रांची : ”हो” संस्कृति पर आधारित पुस्तकों का हो प्रकाशन

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रांची : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में हो भाषा की लिपि ‘वारंग क्षिति’ के जनक और आदिवासी दार्शनिक, कोल गुरु लको बोदरा की 99वीं जयंती मनायी गयी़ इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालयके कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा ने कहा कि हो समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहे लको बोदरा की पुस्तकों […]

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रांची : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में हो भाषा की लिपि ‘वारंग क्षिति’ के जनक और आदिवासी दार्शनिक, कोल गुरु लको बोदरा की 99वीं जयंती मनायी गयी़ इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालयके कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा ने कहा कि हो समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहे लको बोदरा की पुस्तकों का प्रचार-प्रसार होना चाहिए़
हो संस्कृति और संस्कारों पर आधारित पुस्तकों का प्रकाशन हो, ताकि दूसरे लोग भी उन्हें जान सके़ं रांची विवि की प्रतिकुलपति डॉ कामिनी कुमार ने कहा कि भाषा साहित्य को और अधिक समृद्ध करने के लिए अन्य भाषा-भाषी लोगों के साथ सामंजस्य स्थापित करना चाहिए. किसी खास भाषा वर्ग द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में दूसरी भाषा के लोग भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे़ं
कार्यक्रम को हिंदी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो डॉ विंध्यवासिनी नंदन पांडेय, प्राध्यापक डॉ उमेश नंद तिवारी, डॉ हरि उरांव, विभागाध्यक्ष डॉ त्रिवेणी नाथ साहू ने भी संबोधित किया.
दो पुस्तकों का लोकार्पण
इस अवसर पर हो भाषा के साहित्यकार कमल लोचन कोड़ा की दो पुस्तकों ‘हो लोककथा’ और ‘लड़ाका हो’ (लोकगीत) का लोकार्पण भी किया गया़ कार्यक्रम का संचालन डॉ सरस्वती गागराई व धन्यवाद ज्ञापन जयकिशोर मंगल ने किया़
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