भारत छोड़ो आंदोलन : बालकृष्णा स्कूल के रजिस्टर जले थे, काटे गये थे तार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Aug 2018 6:13 AM

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सुनील चौधरी रांची : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक भूमिका निभाने वाले भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने का काम किया था. यह वह आंदोलन था जिसमें पूरे देश की व्यापक भागीदारी रही थी.भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की मशहूर घटना काकोरी कांड के ठीक 17 साल बाद नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी […]

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सुनील चौधरी
रांची : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक भूमिका निभाने वाले भारत छोड़ो आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने का काम किया था. यह वह आंदोलन था जिसमें पूरे देश की व्यापक भागीदारी रही थी.भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की मशहूर घटना काकोरी कांड के ठीक 17 साल बाद नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के आह्वान पर समूचे देश में यह आंदोलन शुरू हुआ था. इस आंदोलन ने देखते ही देखते ऐसा स्वरूप हासिल कर लिया कि अंग्रेजी सत्ता के दमन के सभी उपाय नाकाफी साबित होने लगे थे.
इस आंदोलन में झारखंड के खासकर रांची के छात्रों और टाना भगतों की अहम भूमिका रही थी. 14 अगस्त से ही रांची में जगह-जगह आंदोलन चल रहे थे. कहीं टेलीफोन के तार काटे जा रहे थे, तो कहीं रेलवे लाइन को उखाड़ा जा रहा था. रांची के बालकृष्णा स्कूल के रजिस्टर जलाये गये थे. कोकर, पुरूलिया रोड में टेलीफोन और टेलीग्राफ के तार काटे गये थे. जिला स्कूल प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र था.
जब बंदियों ने जेल में लगे टेलीफोन के तार काट दिये
पटना यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर डॉ केके दत्ता की पुस्तक हिस्ट्री अॉफ द फ्रीडम मूवमेंट इन बिहार 1942-1947 में रांची में चले आंदोलन का जिक्र है.
पुस्तक के अनुसार रांची में भी कुछ छात्र 14 अगस्त 1942 को प्रदर्शन करने के दौरान जिला स्कूल कंपाउंड से गिरफ्तार किये गये थे, तो कुछ लोग कॉलेज भवन के गेट से गिरफ्तार किये गये थे. इनमें तीन लोग बिमल दास गुप्ता, केशव दास गुप्ता और सुनील कुमार राज स्थल पर तो नहीं थे लेकिन आंदोलन के पीछे इनका हाथ होने की बात कह कर इन्हें इनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया था.
कांग्रेस कार्यकर्ता सुखदेव भी गिरफ्तार किये गये थे. इसके दो दिन बाद 16 अगस्त की दोपहर कई छात्र जेल गेट के सामने प्रदर्शन करने लगे और नारे लगाने लगे. उनके नारों की आवाज सुन कर जेल के सारे राजनीतिक बंदी भी गेट की ओर भागे.
इनमें दो बंदी शालीग्राम अग्रवाल और मोतीलाल सिंह अमेठिया गेट के पास आकर नारेबाजी करने लगे. वार्डर से शालीग्राम अग्रवाल ने गेट की चाबी छीन ली. बंदियों ने जेल में लगे टेलीफोन के तार काट दिये. जेल अॉफिस की खिड़की के शीशे तोड़ दिये. जैसे-तैसे जेलर ने इन बंदियों पर काबू पाया और इन्हें वार्ड नंबर सात में कैद कर दिया.
टाना भगतों ने चैनपुर और बिशुनपुर थाना को जला दिया था
इधर, 17 अगस्त 1942 को रांची में एक विशाल जुलूस निकाला गया. सशस्त्र बल के साथ पुलिस ने इन्हें श्रद्धानंद रोड स्थित नागरिक रक्षा समिति के कार्यालय के समक्ष तितर-बितर कर दिया. कुल लोग गिरफ्तार भी किये गये. इनमें एक कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष शिव नारायण मोदी थे.
उसी दिन गुमला एच.इ स्कूल के छात्रों ने भी हड़ताल के लिए प्रदर्शन किया. टाटीसिलवे और नामकुम के बीच के टेलीग्राफ और टेलीफोन के तार काट दिये गये. 18 अगस्त को टाना भगतों के एक समूह ने चैनपुर और बिशुनपुर थाना को जला दिया. बुंडू में हड़ताल की गयी. उसी दिन महादेव देसाई के निधन पर रांची में हड़ताल की गयी. 19 अगस्त को ओरमांझी पुलिस स्टेशन के पास टेलीफोन के तार काट दिये गये. 21 अगस्त को कुछ टाना भगतों ने पुलिस द्वारा सील किये गये सोनचिपी आश्रम के ताले को तोड़ दिया.
इटकी और टांगरबसली के बीच रेलवे लाइन को उखाड़ दिया गया. इसी दिन प्रतुल चंद्र मिश्रा गिरफ्तार किये गये. चरका भगत तब भाग निकले थे, लेकिन बाद में वह गुमला सब डिवीजन से गिरफ्तार किये गये थे. 23 अगस्त को टांगरबसली और इटकी के बीच टेलीफोन के तार काटे गये. रेल की पटरी उखाड़ी गयी.
उसी दिन कई टाना भगत मांडर हाट में जमा हुए. इनका नेतृत्व महादेव सोनार, चमार भगत और गोवा भगत कर रहे थे. इन्होंने आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए सरकारी कर्मचारियों को इस्तीफा देने का दबाव बनाया. ये तीनों 24 अगस्त को गिरफ्तार कर लिये गये.
25 और 26 अगस्त को सिल्ली पुलिस स्टेशन के कोचाजारा में रांची-पुरूलिया रेलवे के टेलीफोन तार आंदोलनकारियों ने काट लिये. 27 अगस्त को पुरूलिया रोड में टेलीग्राफ के तार काट लिये गये. 28 अगस्त को रांची शहर के टेलीफोन तार काट दिये गये. कुछ टाना भगतों ने उस दिन बुढ़मू पुलिस स्टेशन को कब्जा में लेने की कोशिश की पर गिरफ्तार कर लिये गये.
कोकर गांव के लोगों पर किया गया था फाइन
30 अगस्त को रांची के बालकृष्णा हाइस्कूल के रजिस्टर जला दिये गये. तीन सितंबर को रांची जेल कंपाउंड के टेलीग्राफ तार को काट दिया गया.
28 अक्तूबर को कोकर में टेलीग्राफ के तार काट लिये गये थे. इसके चलते सरकार ने कोकर गांव में निवास करने वाले सभी लोगों पर 251 रुपये का फाइन कर दिया था. 30 अक्तूबर की रात रांची पहाड़ी और रांची क्लब के समीप टेलीग्राफ के तार काट दिये गये.
16 नवंबर को रांची में आंदोलन से संबंधित पर्ची बांटते हुए कुछ लोग गिरफ्तार भी किये गये. 18 नवंबर को भी रांची से एक, कुछ टाना भगत और अनिल कुमार मुखर्जी पर्ची बांटते हुए गिरफ्तार किये गये. नौ दिसंबर को कोकर में फिर से टेलीग्राफ के तार काट दिये गये.
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