रांची : मुख्यमंत्री ही सदन की गरिमा को कर रहे तार-तार : बाबूलाल मरांडी

Updated at : 23 Jul 2018 6:33 AM (IST)
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रांची : मुख्यमंत्री ही सदन की गरिमा को कर रहे तार-तार : बाबूलाल मरांडी

राज्यपाल संज्ञान लें, पार्टी लिखित शिकायत करेगी रांची : झाविमो अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि लोकतंत्र में सदन का सर्वोच्च स्थान होता है. यहां जनता प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है. इस सदन की मर्यादा है. सदन में जनप्रतिनिधियों का आचरण संयमित व मर्यादित होनी चाहिए. झारखंड विधानसभा में पिछले सत्र […]

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राज्यपाल संज्ञान लें, पार्टी लिखित शिकायत करेगी
रांची : झाविमो अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि लोकतंत्र में सदन का सर्वोच्च स्थान होता है. यहां जनता प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है. इस सदन की मर्यादा है.
सदन में जनप्रतिनिधियों का आचरण संयमित व मर्यादित होनी चाहिए. झारखंड विधानसभा में पिछले सत्र से ही किसी नये जनप्रतिनिधि का नहीं बल्कि सदन के नेता का जो तानाशाही व्यवहार दिख रहा है, वह पूरी तरह अमर्यादित व लोकतंत्र की इस व्यवस्था के विपरीत है.
सदन के नेता रघुवर दास ने झाविमो के विधायक प्रदीप यादव को सदन के अंदर जिस प्रकार धमकी दी व इशारों में कई बातें कही कि जेल में सड़ा देंगे, यह पूरी तरह अमर्यादित है. प्रदीप यादव सड़क से लेकर सदन तक जनमुद्दों को लेकर मुखर रहते हैं, सरकार की कमियों को उजागर करते रहते हैं, इसलिए उनसे मुख्यमंत्री चिढ़े रहते हैं.
परंतु एक मुख्यमंत्री किसी जनप्रतिनिधि से इस कदर चिढ़ने लगे कि वह सदन की मर्यादा ही तार-तार करने लगे, तब इसे स्वस्थ लोकतंत्र के लिए कतई शुभ संकेत नहीं माना जा सकता है. इसके लिए मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए. इसके साथ ही राज्यपाल महोदया को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए. हम जनता को तमाम बातों से अवगत करायेंगे और जरूरत पड़ी, तो इस मसले को लिखित रूप से राज्यपाल को भी बताया जायेगा.
सदन के अंदर सदन के नेता ही तानाशाही रवैया दिखा रहे हैं
सदन में जनप्रतिनिधियों का आचरण परिभाषित होता है
श्री मरांडी ने कहा कि सदन के अंदर जनप्रतिधियों का आचरण किस अनुरूप हो, वह तमाम चीजें भी परिभाषित होती है़ं ऐसा कभी प्रतीत नहीं होना चाहिए कि कोई जनप्रतिनिधि उद्दंडता कर सदन की गरिमा को तार-तार कर रहा हो.
श्री मरांडी ने कहा कि सदन की गरिमा इन बातों से समझी जा सकती है कि आप सदन में जोर से ठहाका तक नहीं लगा सकते हैं. कविता पढ़ने, गाना गाने, माेबाइल तक नहीं ले जाने की पाबंदी है, यानि आपको पूरी तरह सदन की कार्रवाही पर ही ध्यान केंद्रित करनी होती है़
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