रांची : डेंगू, टीबी व मलेरिया की सूचना सरकार को देना जरूरी, नहीं दिया तो होगी सजा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Jul 2018 6:31 AM (IST)
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संचारी रोगों की रोकथाम है मकसद, सिर्फ मलेरिया में मरीज का परिवार भी जिम्मेदार रांची : सरकार ने सभी संचारी रोगों को फैलने से रोकने तथा इनसे प्रभावित शख्स की जान की हिफाजत के लिए इसे अधिसूचित बीमारी की सूची में शामिल किया है. यानी इनकी रोकथाम के लिए इन बीमारियों की सूचना सरकारी स्वास्थ्य […]
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संचारी रोगों की रोकथाम है मकसद, सिर्फ मलेरिया में मरीज का परिवार भी जिम्मेदार
रांची : सरकार ने सभी संचारी रोगों को फैलने से रोकने तथा इनसे प्रभावित शख्स की जान की हिफाजत के लिए इसे अधिसूचित बीमारी की सूची में शामिल किया है. यानी इनकी रोकथाम के लिए इन बीमारियों की सूचना सरकारी स्वास्थ्य कर्मियों तक (चिकित्सा प्रभारी प्रखंड या सिविल सर्जन को) पहुंचाना जरूरी है.
ऐसा नहीं करने वालों के लिए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराअों के तहत सजा का प्रावधान है. इन अधिसूचित बीमारियों में कालाजार, डेंगू, टीबी व मलेरिया शामिल हैं.
अकेले मलेरिया की अधिसूचना में इस बात का जिक्र है कि बीमारी की सूचना देने के लिए मरीज के घर के गृहस्वामी भी जिम्मेदार होंगे. जबकि कालाजार, डेंगू व टीबी के मामले में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाले, चिकित्सक तथा संबंधित मरीज को दवा देने वाले दवा विक्रेता को ही जिम्मेदार बनाया गया है.
सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह सभी प्रैक्टिशनरों, फार्मासिस्टों, केमिस्टों, दवा विक्रेताअों व रोगियों को सूचना देने के लिए वेब पोर्टल उपलब्ध कराये. टीबी की सूचना वेबपोर्टल nikshay.gov.in पर खुद को निबंधित कर दी जा सकती है. पर मरीज को जल्दी चपेट में लेनेवाले कालाजार, डेंगू व मलेरिया के लिए त्वरित व मैनुअली सूचना ही देनी है.
वेबपोर्टल nikshay.gov.in पर दी जा सकती है टीबी की सूचना
अधिसूचित बीमारी में स्वास्थ्य कर्मियों व अन्य को अधिकार
सरकार जिन बीमारियों को अधिसूचित करती है, इनके मामले में स्वास्थ्य कर्मियों को कुछ अधिकार मिल जाते हैं, जिससे उन्हें रोका नहीं जा सकता तथा ऐसा करना अपराध माना जाता है.
इन अधिकारों में रोगी की सुविधा के अनुसार मरीज के घर का दौरा करना, पीड़ित व्यक्ति व उनके परिवार की काउंसेलिंग करना, उपचार प्रक्रिया का पालन तथा बाद में पूरा उपचार सुनिश्चित करने के लिए सहायता देना, रोग फैलाने वाले व्यक्ति या परिस्थिति का पता लगाना, रोग के लक्षणों की जांच तथा रोगी को उपलब्ध समाज कल्याण व सहायता योजनाअों से जोड़ना शामिल हैं.
सूचना नहीं देने तथा उपचार में कोताही पर सजा
(आइपीसी की धाराअों के तहत)
मलेरिया (अधिसूचना -17.7.18) : एक माह की जेल व 200 रुपये जुर्माना (आइपीसी-188)
टीबी (अधिसूचना – 9.5.18) : छह माह तक कारावास या जुर्माना या दोनों (आइपीसी-269) तथा अधिकतम दो वर्ष या जुर्माना या दोनों (आइपीसी-270)
डेंगू (अधिसूचना -29.8.17) : एक माह की जेल व 200 रुपये जुर्माना (आइपीसी-188)
कालाजार (अधिसूचना -16.4.2016) : एक माह की जेल व 200 रुपये जुर्माना (आइपीसी-188) (धारा 188 सरकारी काम में बाधा से संबंधित है. यदि किसी बाधा के कारण मरीज की मौत होती है, तो इसकी सजा छह माह तक का कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना होगी)
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