रांची: भाजपा एसटी मोर्चा का आरोप, एक कंपनी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं प्रभाकर तिर्की
Updated at : 16 Jul 2018 7:06 AM (IST)
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रांची: भाजपा एसटी मोर्चा के उपाध्यक्ष अशोक बड़ाइक ने कहा है कि ईसाई महासभा ने बिना प्रशासन की अनुमति के मानव शृंखला बनायी. छोटे-छोटे बच्चे को हाथ में तख्ती देकर खड़ा कराया गया़ राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन का विरोध करते है़ं वे कहते हैं कि इससे […]
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रांची: भाजपा एसटी मोर्चा के उपाध्यक्ष अशोक बड़ाइक ने कहा है कि ईसाई महासभा ने बिना प्रशासन की अनुमति के मानव शृंखला बनायी. छोटे-छोटे बच्चे को हाथ में तख्ती देकर खड़ा कराया गया़ राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन का विरोध करते है़ं
वे कहते हैं कि इससे विस्थापन होगा़ वहीं दूसरी ओर श्री तिर्की गोड्डा में 25 सौ एकड़ में पावर प्लांट लगा रहे मुर्मू पावर प्रोजेक्ट के आधिकारिक रूप से एडवाइजर है़ं श्री बड़ाइक रविवार को पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे़
उन्होंने कहा कि श्री तिर्की एक कंपनी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं और आदिवासी परिवार की चिंता भी कर रहे है़ं उनका दोहरा चरित्र झारखंड की जनता देख चुकी है़ इनके इरादे का पर्दाफाश हो गया है़ एसटी मोर्चा के उपाध्यक्ष लखन मार्डी ने कहा कि कानून का उल्लंघन सबसे ज्यादा चर्च ने किया है़
1996 से पहले सीएनटी एक्ट व एसपीटी एक्ट में प्रावधान था कि सामाजिक संस्थाएं जमीन ले सकती है़ं 1996 में केंद्र में कांग्रेस और बिहार राज्य में राजद और झामुमो की सरकार ने उद्योगों को जमीन देने के नाम पर एक्ट में संशोधन किया़
साथ में यह भी संशोधन किया गया कि सामाजिक संस्थाओं को जमीन नहीं दी जा सकती है़ 1996 के बाद खूंटी, सिमडेगा, गुमला, चाईबासा, संताल परगना सहित कई इलाके में गरीब आदिवासियों से औने-पौने दाम में जमीन लेकर या सरकारी जमीन पर विभिन्न चर्च का निर्माण किया गया.
श्री मार्डी ने कहा कि हम सरकार से मांग करते हैं कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर जो भी चर्च बने हैं, उससे जमीन वापस लेकर झारखंड के गरीब आदिवासियों को वह जमीन बांट दी जाये़ मौके पर प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव व शिवपूजन पाठक भी मौजूद थे़
पोक्सो एक्ट के तहत षड्यंत्रकारियों पर दर्ज हो केस
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोट बैंक की राजनीति करने वाले जनाधार विहीन बाबूलाल मरांडी और कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दल के नेता मिशनरी ऑफ चैरिटी के पक्ष में खड़ा हो जाते है़ं
आज की तिथि में मिशनरी ऑफ चैरिटी न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार के एडॉप्शन पॉलिसी में अनुबंधित है़ 2013-14 में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश सिंह और अफजल हुसैन ने मिशनरी ऑफ चैरिटी की शाखा की जांच करने का प्रयास किया था, उसके बाद तुरंत दोनों को हटा दिया गया़ यह काम हेमंत सोरेन की सरकार ने किया था़ इससे साफ है कि उस समय की सरकार ईसाई मिशनरियों के दबाव में थी़
मिशनरी ऑफ चैरिटी के शेल्टर होम में रहने वाली नाबालिग लड़कियों के साथ हुई लैंगिक हिंसा को छुपाया जाता रहा है़ यह घटनाएं पोक्सो एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आती है़ प्रशासन को इन बारीकियों की जांच करनी चाहिए़ मिशनरी ऑफ चैरिटी द्वारा लैंगिक उत्पीड़न से पीड़ित नाबालिगों को गलत तरीके से संरक्षण देने के कारण मिशनरी ऑफ चैरिटी पर कार्रवाई होनी चाहिए़
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