रांची : बैंक में कर्मियों की सेवा नियमित व रद्द करने का खेल

Updated at : 02 Jul 2018 6:10 AM (IST)
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रांची : बैंक में कर्मियों की सेवा नियमित व रद्द करने का खेल

पहले 18 कर्मियों की सेवा नियमित की, फिर रद्द, सात साल बाद फिर 14 कर्मियों को नियमित किया रांची : राज्य के को-ऑपरेटिव बैंक में संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों की सेवा नियमित करने और रद्द करने का खेल जारी है. इसी क्रम में सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने पहले 18 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की […]

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पहले 18 कर्मियों की सेवा नियमित की, फिर रद्द, सात साल बाद फिर 14 कर्मियों को नियमित किया
रांची : राज्य के को-ऑपरेटिव बैंक में संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों की सेवा नियमित करने और रद्द करने का खेल जारी है. इसी क्रम में सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने पहले 18 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा नियमित की. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया.
पांच महीने बाद तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या करने का हवाला देते हुए नियमितीकरण के आदेश को रद्द कर दिया. फिर सात साल बाद एक आदेश निकाल कर इनमें से 14 कर्मचारियों की सेवा पिछली तिथि से नियमित कर दी.
27 जुलाई 2009 को निबंधक (सहयोग समितियां) के हस्ताक्षर से 18 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा नियमित करने का आदेश निकला.
इस आदेश में इस बात की उल्लेख किया गया कि को-अॉपरेटिव बैंक इंप्लाइज यूनियन और निबंधक के बीच हुए समझौता के आलोक में सभी प्रबंध निदेशकों से दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया. इसके आलोक में केंद्रीय सहकारी बैंक गुमला ने दैनिक वेतन भोगी और अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों की सूची भेजी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के आलोक में इनकी सेवा नियमित करने का अनुरोध किया. इस अनुरोध और न्यायालय के आदेश पर विचार करने के बाद निबंधक ने झारखंड सहकारी समितियां नियमावली के उप नियम 33 में प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 18 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा नियमित करने का आदेश दिया. इस आदेश के आलोक में इन कर्मचारियों की सेवा नियमित कर दी गयी.
पर ठीक पांच माह बाद 30 नवंबर 2009 को निबंधक ने नियमित किये गये इन कर्मचारियों को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया. इसमें यह लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर को-ऑपरेटिव बैंक के कर्मचारियों की सेवा नियमित करा ली गयी थी. इस मामले में फिर से विचार करने के बाद संबंधित कर्मचारियों की सेवा निमयित करने के लिए जारी आदेश को रद्द किया जाता है.
इसके सात साल झारखंड को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने तीसरा आदेश निकाला. इसमें यह लिखा कि निबंधक द्वारा 25 अक्तूबर 2017 को दिये गये आदेश के आलोक में 15 कर्मचारियों की सेवा जुलाई 2009 की तिथि से नियमित की जाती है. इनमें 14 कर्मचारी एेसे थे जिनकी सेवा नियमित करने आदेश नवंबर 2009 में जारी किया गया था.
रद्द होने के बाद फिर से नियमित कर्मचारी
नाम पद
निर्मल धरोई सहायक
लोदो सिंह सहायक
मारिया कांति सहायक
श्रवण कुमार सहायक
शांतनु साहू सहायक
प्रतिमा लकड़ा सहायक
शैलेष कुमार तिवारी सहायक
नाम पद
सुमंत प्रकाश एक्का सहायक
विनोद कुमार महतो सहायक
जग्गा उरांव सहायक
अशोक कुमार राय सहायक
महेश्वर सिंह सहायक
रामकिशोर कुमार सहायक
मनोज कुमार चौधरी सहायक
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