दुमका : मानने योग्य नहीं, वापस हो भूमि अधिग्रहण में संशोधन : शिबू सोरेन
Updated at : 30 Jun 2018 2:14 AM (IST)
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दुमका : झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो सह पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने कहा है कि रघुवर सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन वापस होना चाहिए. यह बदलाव झारखंड के आदिवासियों-मूलवासियों के हित में नहीं है. समाहरणालय में बैठक करने के बाद श्री सोरेन ने मीडियाकर्मियों से कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में किया […]
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दुमका : झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो सह पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने कहा है कि रघुवर सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन वापस होना चाहिए. यह बदलाव झारखंड के आदिवासियों-मूलवासियों के हित में नहीं है.
समाहरणालय में बैठक करने के बाद श्री सोरेन ने मीडियाकर्मियों से कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में किया गया बदलाव झारखंडवासियों को स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले से बने कानून अच्छे हैं, जिनकी बदौलत झारखंडवासियों की जमीन सुरक्षित बची हुई है. जो संशोधन हुआ है, वह मानने योग्य नहीं है. इसलिए विरोध हो रहा है. आगे भी विरोध होगा.
जनजातीय कमेटी को आदिवासियों की जानकारी नहीं : हेमंत : इधर, साहिबगंज में नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जनजातीय परामर्शदातृ कमेटी को जनजातियों की घटती आबादी के बारे में जानकारी नहीं है. बिना विशेषज्ञों के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर जनजातियों की घटती आबादी का कारण नहीं जाना जा सकता है.
यह बताया जाये कि आखिर इस कमेटी में कौन विशेषज्ञ हैं. 10 वर्षों में जनजाति आबादी में बहुत तेजी से गिरावट आयी है. इसके लिए कहीं न कही भाजपा की सरकार जिम्मेदार है. आदिवासी मूलवासी की जमीन छीनी जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की बर्खास्तगी के लिए झामुमो राज्यपाल से जल्द मुलाकात करेगा.
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