आइएससी में राज्य में नौवां स्थान पानेवाले नीरज को रसायनशास्त्र में मिला था 12 अंक

Updated at : 27 Jun 2018 6:21 AM (IST)
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आइएससी में राज्य में नौवां स्थान पानेवाले नीरज को रसायनशास्त्र में मिला था 12 अंक

सुनील कुमार झा ऐसे कॉपी जांचते हैं मास्टर साहब, परीक्षकों ने अंकों के योग में की थी गड़बड़ी रांची : इंटरमीडिएट साइंस (2018) की परीक्षा में झारखंड में नौवां स्थान प्राप्त करनेवाला काशी साहू कॉलेज सरायकेला का छात्र नीरज दास गलत मूल्यांकन के कारण रसायन शास्त्र में फेल कर गया था. उसे कुल 12 नंबर […]

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सुनील कुमार झा
ऐसे कॉपी जांचते हैं मास्टर साहब, परीक्षकों ने अंकों के योग में की थी गड़बड़ी
रांची : इंटरमीडिएट साइंस (2018) की परीक्षा में झारखंड में नौवां स्थान प्राप्त करनेवाला काशी साहू कॉलेज सरायकेला का छात्र नीरज दास गलत मूल्यांकन के कारण रसायन शास्त्र में फेल कर गया था. उसे कुल 12 नंबर मिले थे.
जैक द्वारा सात जून को जारी रिजल्ट में नीरज को कुल 397 अंक मिले थे. उसे गणित में 99, भौतिकी में 91, अंग्रेजी में 77, जीव विज्ञान में 89, रसायन शास्त्र में 12 अंक मिले थे. स्क्रूटनी के बाद रसायन शास्त्र की थ्योरी में 12 की जगह 55 अंक मिले.
वहीं प्रैक्टिकल में 29 अंक मिले. रसायनशास्त्र में कुल उसे 84 अंक मिला. अंकों के योग में सुधार के बाद उसे 500 अंकों की परीक्षा में कुल 440 अंक मिले. वहीं दूसरी ओर नीरज को झारखंड में इंजीनियरिंग की परीक्षा में 1059 और झारखंड पॉलिटेक्निक की परीक्षा में राज्य में 57वां रैंक प्राप्त हुआ है. इस आधार पर नीरज ने स्पेशल स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया था.
रिजल्ट के बाद तीन दिन तक रोता रहा नीरज : रिजल्ट जारी होने के बाद रसायनशास्त्र में फेल हो जाने के कारण नीरज तीन दिनों तक रोता रहा. उसके बड़े भाई सूरज दास ने बताया कि वह गुमशुम रहने लगा. उसने खाना-पीना छोड़ दिया. उसकी तबीयत खराब हो गयी. बार-बार वह यही कहता था कि इतने कम नंबर उसे आ ही नहीं सकते. कॉपी जांच में जरूर गड़बड़ी हुई होगी.
स्क्रूटनी के बाद जब उसे रसायनशास्त्र में 12 की जगह 84 अंक मिले तब जाकर उसके चेहरे पर हंसी आयी. सूरज को मैट्रिक में भी 90.2 फीसदी अंक मिले थे. वह सरायकेला-खरसावां जिले का सेकेंड टॉपर था.
मूल्यांकन में गड़बड़ी का खामियाजा भुगतते हैं विद्यार्थी : मूल्यांकन में गड़बड़ी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है. जैक के गाइडलाइन के मुताबिक एक दिन में न्यूनतम 30 व अधिकतम 40 उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन परीक्षक कर सकते हैं.
बाद में मूल्यांकन दो शिफ्टों में कर दिया गया. जो परीक्षक पहले दस से चार बजे के बीच तक 30 से 40 कॉपी का मूल्यांकन कर रहे थे, वे अब नौ बजे सुबह से छह बजे शाम तक 60 उत्तरपुस्तिकाओं तक का मूल्यांकन करने लेंगे. इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है.
वैसे परीक्षार्थी जो मेडिकल-इंजीनियरिंग परीक्षा में सफल हैं, और अपने अंक से संतुष्ट नहीं हैं, तो उनके लिए स्पेशल स्क्रूटनी की व्यवस्था की गयी है. परीक्षार्थियों को स्क्रूटनी के बाद रिजल्ट देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. परीक्षक मार्क्स फाइल पर अंक लिखने में गलती कर देते हैं. मूल्यांकन में गड़बड़ी करनेवाले परीक्षकों पर हर वर्ष कार्रवाई भी की जाती है.
डॉ अरविंद प्रसाद सिंह, जैक अध्यक्ष
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