नागरिकता पर होगी संदेह तो वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं होगा नाम, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कर दिया साफ

Author Ashish Jha
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मतदाता सूची में नाम दर्ज कराते लोग

SIR Case In Supreme Court: चुनाव आयोग को उस व्यक्ति की नागरिकता छीनने या उसे निर्वासित करने का कोई अधिकार नहीं है. इस मामले की सुनवाई 15 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश की अदालत में फिर से शुरू होगी.

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SIR Case In Supreme Court: कोलकाता. नागरिकता को लेकर जरा सा भी संदेह होने पर नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा. बंगाल में SIR को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को यह बात बताई है. हालांकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची के पीठ के समक्ष चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ईआरओ नागरिकता के बारे में अंतिम निर्णय लेने का अधिकारी नहीं है, लेकिन नागरिकता पर संदेह होने पर वोटर लिस्ट में नाम शामिल नहीं होगा. किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होने से यह निर्णायक रूप से साबित नहीं किया जा सकता कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है, क्योंकि नागरिकता निर्धारित करने की अंतिम जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होती है.

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गैर भारतीय को वोटर लिस्ट से हटाना SIR का मुख्य उद्देश्य

एसआईआर की सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने आयोग के वकील से पूछा कि क्या किसी व्यक्ति को तब तक मतदान का अधिकार नहीं होगा, जब तक कि केंद्र सरकार उसकी नागरिकता निर्धारित नहीं कर देती. इसके जवाब में आयोग के वकील ने कहा कि SIR प्रक्रिया में नागरिकता के सत्यापन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो लोग नागरिक नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएं. आयोग के पास व्यक्ति की नागरिकता रद्द करने या उसे देश से निकालने का अधिकार नहीं है. सुनवाई की प्रक्रिया 15 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश की अदालत में फिर से शुरू होगी.

तृणमूल सांसदों की याचिका पर चल रही सुनवाई

तृणमूल के दो राज्यसभा सांसद, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन ने SIR प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. उस मामले में सुप्रीम कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व करने वाले वकील कपिल सिबल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग SIR के संबंध में सभी निर्देश सोशल मीडिया पर दे रहा है. बीएलओ को व्हाट्सएप के माध्यम से SIR से संबंधित कार्य करने के निर्देश दिए जा रहे हैं. तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने पहले भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी थी. उन्होंने आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बैठक में भी यह मुद्दा उठाया. तृणमूल ने आयोग द्वारा बताई गई तार्किक विसंगतियों की सूची पर सर्वोच्च न्यायालय में सवाल उठाए. उन्होंने यह भी शिकायत की कि मतदाताओं को कोई रसीद या सबूत नहीं दिया जा रहा था, जबकि उन्होंने SIR सुनवाई के दौरान दस्तावेज जमा किए थे.

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