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चारा घोटाला : अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव एके सिंह, वीएस दुबे, डीपी ओझा व सीबीआइ के एके झा को बनाया आरोपी

Updated at : 07 Mar 2018 6:36 AM (IST)
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चारा घोटाला : अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव एके सिंह, वीएस दुबे, डीपी ओझा व सीबीआइ के एके झा को बनाया आरोपी

रांची : सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने चारा घोटाले के कांड संख्या आरसी 38ए/96 में बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, बिहार व झारखंड के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव वीएस दुबे, बिहार के सेवानिवृत्त डीजी विजिलेंस डीपी अोझा व सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा को नोटिस जारी किया है. इनके अलावा सप्लायर […]

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रांची : सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने चारा घोटाले के कांड संख्या आरसी 38ए/96 में बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, बिहार व झारखंड के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव वीएस दुबे, बिहार के सेवानिवृत्त डीजी विजिलेंस डीपी अोझा व सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा को नोटिस जारी किया है. इनके अलावा सप्लायर दीपेश चांडक, शिव कुमार पटवारी अौर फूल झा को भी नोटिस भेजा है.
इन सभी पर चारा घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. सभी सात लोगों के खिलाफ धारा 319 के तहत नोटिस जारी किया गया है. इन सभी को 28 मार्च को अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया गया है. सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा चारा घोटाले में राजनीतिज्ञों से जुड़े सबसे बड़े मामले आरसी 20ए/96 के जांच अधिकारी रहे हैं. चारा घोटाले में पहली बार किसी सीबीआइ अधिकारी को आरोपी बनाने के लिए नोटिस जारी किया गया है.
एके सिंह पर घोटालेबाजों से मिले होने का आरोप : सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह पर भी घोटालेबाजों के साथ मिले होने का आरोप लगाया है. उन पर घोटालेबाजों के खिलाफ कार्रवाई करने में देर करने आरोप लगाया गया है. चारा घोटाले की अवधि में अंजनी कुमार सिंह दुमका में उपायुक्त के पद पर पदस्थापित थे.
वीएस दुबे और डीपी ओझा पर देर से कार्रवाई करने का आरोप : बिहार के तत्कालीन वित्त सचिव वीएस दुबे व तत्कालीन डीजी विजिलेंस डीपी अोझा के खिलाफ भी चारा घोटाले में देर से कार्रवाई करने का आरोप लगाया गया है. सीबीआइ के एडिशनल एसपी एके झा पर भी घोटालेबाजों से मिले होने का आरोप लगाया है.
एके झा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कांड संख्या आरसी 20 में जो दस्तावेज जब्त किये थे, उसके हिसाब से डीपी अोझा के खिलाफ भी अभियोजन स्वीकृति ली जानी चाहिए थी. लेकिन वह डीपी अोझा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति लेने में असफल रहे.
गवाह है शिवकुमार पटवारी : दीपेश चांडक चारा घोटाले के बड़े सप्लायर के रूप में चिह्नित हैं. इसलिए कोर्ट ने उसे भी इस मामले में नोटिस जारी किया है. शिवकुमार पटवारी भी चारा घोटाला में सप्लायर हैं. सीबीआइ ने कांड सं आरसी 38ए/96 मामले में उसे गवाह बनाया है. फूल झा के खिलाफ आरोप लगाया गया है कि उसने कोर्ट में गलतबयानी की.
क्या है आरसी 38ए/96
1995-96 में दुमका कोषागार से कुल तीन करोड़ 13 लाख रुपये की अवैध निकासी की गयी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 1996 चारा घोटाले की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश दिया था. इस आदेश के आलोक में सीबीआइ ने दुमका कोषागार से हुई निकासी के मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की थी. इससे पहले दुमका जिला प्रशासन ने भी एफआइआर दर्ज करायी थी. वर्ष 2000 में 48 आरोपियों के खिलाफ सीबीआइ ने चार्जशीट दायर किया था. 2005 में मामले में चार्जफ्रेम किया गया.
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