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रिटायरमेंट से पहले मुश्किलों में घिरीं झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, पीएमओ से आया ‘एक्शन’ का लेटर

Updated at : 07 Feb 2018 8:53 AM (IST)
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रिटायरमेंट से पहले मुश्किलों में घिरीं झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, पीएमओ से आया ‘एक्शन’ का लेटर

रांची : झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा रिटायरमेंट से पहले मुश्किलों में घिरती जा रही हैं. एक प्राईवेट बैंक के अधिकारी को चिट्ठी लिखकर अपने बेटे की कंपनी में निवेश करने का कथित दबाव बनाने के लिए वह विपक्ष के निशाने पर थीं. चारा घोटाला मामले में लापरवाही बरतने के उन पर आरोप लगे […]

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रांची : झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा रिटायरमेंट से पहले मुश्किलों में घिरती जा रही हैं. एक प्राईवेट बैंक के अधिकारी को चिट्ठी लिखकर अपने बेटे की कंपनी में निवेश करने का कथित दबाव बनाने के लिए वह विपक्ष के निशाने पर थीं. चारा घोटाला मामले में लापरवाही बरतने के उन पर आरोप लगे थे. अब एक नयी मुश्किल सामने आयी है. उन पर कोयला खदान आवंटन में गड़बड़ी करने वाले अधिकारी को बचाने के आरोप लगे हैं. इस शिकायत पर खुद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने संज्ञान लिया है. PMO से मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव को एक पत्र आया है, जिसमें राजबाला वर्मा और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एपी सिंह के खिलाफ जांच करने की बात कही गयी है.

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, खूंटी जिले के झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के जिला अध्यक्ष दिलीप मिश्रा की जुलाई और सितंबर, 2017 में राजबाला वर्मा के खिलाफ पीएमओ को भेजी गयी शिकायत के आधार पर पीएमओ ने यह चिट्ठी भेजी है. दिलीप मिश्रा ने खत लिखकर राजबाला वर्मा और एपी सिंह के खिलाफ पीएमओ में अपनी शिकायत दर्ज करायी थी.

मिश्रा ने अपनी शिकायत में कहाथा कि पलामू की तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल के खिलाफ हो रही जांच में राजबाला वर्मा और एपी सिंह ने गलत तरीके से रिपोर्ट तैयार की और उन पर दोष साबित नहीं होने दिया. इसी शिकायती पत्र पर केंद्र के मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल, पब्लिक ग्रिवांस एंड पेंशन के पर्सनल एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट की ओर से पीएमओ में अवर सचिव केसी राजू ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच कराने की बात कही है.

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25 जनवरी, 2018 को दिल्ली से भेजीगयी इस चिट्ठी मेंमुख्यसचिव राजबाला वर्मा और दूसरे सीनियर आईएएस अधिकारी एपी सिंह के खिलाफ उचित एक्शन लेने को कहा गया है. पूरा मामला पलामू जिले में कठोतिया कोल ब्लॉक प्राइवेट लिमिटेड की करीब 200 एकड़ जमीन को गलत तरीके से एक निजी कंपनी को आवंटित करने से जुड़ा है. बादमें निजी कंपनी ने यह जमीन बिरला ग्रुप को दे दी. उस समय पूजा सिंघल पलामू की उपायुक्त थीं. पूजा सिंघल पर आरोप था कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए ये कोल ब्लॉक निजी कंपनी को आवंटित की.

मामले ने तूल पकड़ा, तो इसकी जांच कमिश्नर स्तर के अधिकारी से करायी गयी. जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आयी कि पलामू की तत्कालीन डीसी पूजा सिंघल ने कोल ब्लॉक आवंटन में अनियमितता बरती. डीसी के इस फैसले से सरकार को करोड़ों रुपयेके राजस्व की क्षति हुई है.

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रिपोर्ट में कहा गया कि कोल ब्लॉक का आवंटन सरकार के कहने पर कमिश्नर स्तर के अधिकारी की तरफ से किया जाना चाहिए, लेकिन डीसी रहते पूजा सिंघल ने कठोतिया कोल ब्लॉक को एक निजी कंपनी को आवंटित कर दिया. पूजा सिंघलपर चतरा, खूंटी और पलामू में भी कई मामलों में अनियमितता बरतनेके आरोप लगे.

मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने नियंत्री कार्य पदाधिकारी एपी सिंह के अधीन एक जांच समिति का गठन किया. उन्होंने पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें पूजा सिंघल को क्लीन चिट दे दी गयी. रिपोर्ट को आधार बनाकर राजबाला वर्मा ने सरकार के स्तर पर पूजा सिंघल को जांच में सभी आरोपों में बरी कर दिया.आश्चर्य की बात यह है कि इन्हीं मामलों में कई जूनियर इंजीनियर (जेई) और असिस्टेंड इंजीनियर (एई) को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी.

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

दिलीप मिश्रा के मुताबिक, मुख्य सचिव और एपी सिंह ने मिलकर पूजा सिंघल को बचाया.दिलीपने कई बार सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. जांच की मांग नहीं माने जाने पर उन्होंने आरटीआई का सहारा लिया. सारे कागजात निकालने के बाद चीफ विजिलेंस कमिश्नर और पीएमओ में शिकायत दर्ज करायी. इसके बाद पीएमओ की तरफ से सरकार के प्रधान सचिव को मामले पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं.

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