हड़ताल खत्म, रोजगार में स्थानीय लोगों को मिलेगी प्राथमिकता, मुआवजा के लिए सीएम से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

रामगढ में वार्ता के बाद खत्म हुई विस्थापितों की भूख हड़ताल
भुरकुंडा/पतरातू : पीवीयूएनएल व प्रशासन की दमनकारी नीति के खिलाफ 25 गांवों में जारी भूख हड़ताल आठवें दिन वार्ता के बाद खत्म हो गयी. पतरातू अंचल कार्यालय में बुधवार को आयोजित त्रिपक्षीय वार्ता में विस्थापित प्रतिनिधि, प्रशासनिक पदाधिकारी व पीवीयूएनएल अधिकारी शामिल हुए.
वार्ता में विस्थापितों की सबसे प्रमुख मांग रोजगार में उन्हें प्राथमिकता देने को मान लिया गया. इसके लिए प्रबंधन एक नियोजन कार्यालय खोलेगा. इसके तहत स्थानीय लोगों को रोजगार, ठेकेदारी सहित अन्य कार्यों में प्राथमिकता मिलेगी. स्थानीय व विस्थापितों की पहचान अंचल कार्यालय द्वारा की जायेगी.
इसके अलावा पंचायत के मुखिया द्वारा सत्यापित लोगों को भी मान्यता दी जायेगी. मुआवजा के मुद्दे पर तय हुआ कि विस्थापितों के एक प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मिलवाया जायेगा. यहां विस्थापित दस्तावेजों के आधार पर अपनी मांग रखेंगे. इसमें अंतिम निर्णय राज्य सरकार लेगी. यह भी तय हुआ कि रोजगार के लिए बाहरी लोगों के सत्यापन का कार्य अब थाना स्तर से नहीं होकर एसडीपीओ स्तर से किया जायेगा.
वार्ता के बाद विभिन्न गांवों में पहुंच कर अनशनकारियों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त करायी गयी. वार्ता में अपर समाहर्ता जुगनू मिंज, एसडीपीओ प्रकाशचंद्र महतो, बीडीओ देवदत्त पाठक, सीओ निर्भय कुमार, इंस्पेक्टर विपिन कुमार, एनटीपीसी के पीके विश्वास, वाइ देवाशीष, कुंतल मजुमदार, विस्थापित प्रतिनिधियों में रोशनलाल चौधरी, शिवलाल महतो, आदित्य नारायण प्रसाद, कुमेल उरांव, अनिल राय, प्रदीप महतो, किशोर कुमार महतो, भुनेश्वर महतो, विजय मुंडा, राजाराम प्रसाद, मो अलीम, कौलेश्वर महतो, सुरेश साहू शामिल थे. मोर्चा के अध्यक्ष आदित्य नारायण प्रसाद ने कहा कि 25 गांवों की एकजुटता व सभी के सहयोग के कारण उनका आंदोलन एक मुकाम तक पहुंचा.
विधायक अंबा प्रसाद द्वारा मंगलवार को अपने दौरे में की गयी बयानबाजी व भूख हड़ताल को तुड़वाने की कोशिश के खिलाफ बुधवार को विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा ने बैठक की. बैठक में कहा गया कि विधायक ने विस्थापित ग्रामीणों की एकजुटता को तोड़ने की कोशिश की है. उन्हें विस्थापितों के दुख-दर्द से कोई मतलब नहीं है.
मोर्चा ने कहा कि विधायक अंबा प्रसाद ने संबंधित कंपनी से सांठगांठ कर हमारे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की. विधायक का यह कृत्य कहीं से भी सही नहीं है. दूसरी ओर, बलकुदरा में ग्रामीणों ने विधायक के खिलाफ नारेबाजी भी की. बैठक में अजय मुंडा, प्रेम मुंडा, अनिल मुंडा, मिलन मुंडा, पंचम, राजेंद्र साव, अनिल साव, सुबोध किशोर, शुभम कुमार, नवीन मुंडा, पवन मुंडा, करमा मुंडा, रामप्रवेश, मनीष मुंडा, राहुल मुंडा, चंचला कुमारी, जालो देवी आदि उपस्थित थे.
विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा के उपाध्यक्ष असगर अली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जारी बयान में उन्होंने कहा है कि आज की वार्ता में कोई ठोस हल नहीं निकला. वार्ता के नाम पर सिर्फ ठगा गया है. प्रशासन शुरू से जो बात कह रहा था, वार्ता में भी वही हुआ. इससे पता चलता है कि आंदोलन को बेच दिया गया है. मोर्चा एक विशेष दल का नेतृत्व करता है. इसकी कथनी व करनी में फर्क है. एक पार्टी विशेष के इशारे पर मोर्चा नाच रहा है. इससे ग्रामीणों में मोर्चा के खिलाफ नाराजगी है.
आजसू के केंद्रीय महासचिव रोशनलाल चौधरी ने वार्ता की सफलता के बाद कहा कि सभी की एकजुटता के कारण ही आंदोलन को सफलता मिली है. भविष्य में भी इसे बनाये रखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि आजसू शुरू से विस्थापित प्रभावित ग्रामीणों के साथ खड़ी रही है. आगे भी हक-अधिकार के मुद्दे पर होनेवाले आंदोलनों को आजसू का समर्थन मिलता रहेगा.
posted by : sameer oraon
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