पतरातू में पसरा रहा सन्नाटा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Oct 2015 1:25 AM (IST)
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दहशत. गैंगस्टर किशोर पांडेय के पिता कामेश्वर पांडेय की हत्या के बाद बंद रही दुकानें पतरातू : गैंगस्टर किशोर पांडेय के पिता कामेश्वर पांडेय की हत्या के बाद मंगलवार को दूसरे दिन भी भयमिश्रित गम के कारण पूरा पतरातू बंद रहा. पतरातू बाजार, लोको मार्केट, न्यू मार्केट, बिरसा मार्केट सहित कॉलोनियों के छोटे-मोटे बाजार पूरी […]
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दहशत. गैंगस्टर किशोर पांडेय के पिता कामेश्वर पांडेय की हत्या के बाद बंद रही दुकानें
पतरातू : गैंगस्टर किशोर पांडेय के पिता कामेश्वर पांडेय की हत्या के बाद मंगलवार को दूसरे दिन भी भयमिश्रित गम के कारण पूरा पतरातू बंद रहा. पतरातू बाजार, लोको मार्केट, न्यू मार्केट, बिरसा मार्केट सहित कॉलोनियों के छोटे-मोटे बाजार पूरी तरह बंद रहे. सुबह से ही क्षेत्र में सन्नाटा पसरा रहा. किसी ने भी इस बंद में अपनी दुकान खोलने की हिमाकत नहीं की.
हालांकि लोग चौक-चौराहों पर कामेश्वर पांडेय की हत्या व इससे जुड़े मसलों पर चर्चा करते दिखे. इस दौरान क्षेत्र की बैंकिंग, नन बैंकिंग शाखाओं समेत एटीएम में भी ताले लटके रहे. वहीं, सड़कें भी वीरान रही. पतरातू से रांची, भुरकुंडा व रामगढ़ के लिए चलने वाली बसें, टैक्सी व ऑटो नहीं दिखे. यहां तक कि मालवाहक वाहनों का भी परिचालन पूरी तरह बंद रहा. इक्के-दुक्के दोपहिया वाहन ही यदा-कदा सन्नाटे को तोड़ रहे थे.
बंद का आलम ऐसा था कि सभी दवा दुकानें भी नहीं खुली थी. बंद का आलम यह था कि ठेला-खोमचा भी नदारद थे. लोगों का कहना था कि ऐसा बंद पहले कभी नहीं देखा था. राजनीतिक पार्टी या नक्सलियों के बंद में भी दोपहर के बाद स्थिति सामान्य हो जाती थी. 50 फीसदी से ज्यादा बाजार खुल जाते थे. लेकिन इस बंद के दौरान सुबह से लेकर देर शाम तक नजारा एक सा था.
बंद के दौरान अर्द्ध सैनिक बलों ने किया फ्लैग मार्च : घटना के बाद पतरातू क्षेत्र में विधि-व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन हाइ अलर्ट पर रहे. पुलिस ने यहां जिले से अतिरिक्त बल के अलावा आइआरबी के जवानों को तैनात किया था. डीएसपी खुद कैंप किये हुए थे.
बंद के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अर्द्ध सैनिक बल के जवानों के साथ पुलिस ने भी सड़क पर फ्लैग मार्च किया. यह नजारा पतरातू के विभिन्न सड़कों पर दिन भर में कई बार दिखा. इस दौरान पुलिस बल हर विपरीत परिस्थिति से निबटने के लिए साजो-सामान से लैस थी. पूरा पतरातू क्षेत्र छावनी में तब्दील नजर आ रहा था.
हलकान रहे यात्री : घटना से अंजान जो भी यात्री पतरातू आये, वो अपने गंतव्य पर जाने के लिए परेशान दिखे. खासकर विभिन्न जगहों से ट्रेन से आये यात्री हलकान थे. यात्री चौक-चौराहों पर घंटों गाड़ियों का इंतजार करते देखे गये. बाद में अपने गंतव्य की ओर पैदल ही निकल गये. शहीद भगत सिंह चौक पर अपने दो बच्चों के साथ ट्रेन से मुरी से पतरातू आयी सुमित्रा देवी कटिया जाने के लिए परेशान थी. उसे घटना के बारे में कुछ भी नहीं मालूम था.
उसका पति एक होटल में काम करता था. वो अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ बैग लेकर चौक पर खड़ी थी. जब दूसरे राहगीरों ने उसे हालात से अवगत कराया, तो वह पैदल ही अपने गंतव्य की ओर चल पड़ी. क्षेत्र के एक आइटीआइ सेंटर में पढ़ने वाला बोकारो का छात्र मो रजक व मुरी के नीतीश भी परेशान था. दोनों ने बताया कि वह भुरकुंडा पहुंचे थे.
लेकिन पतरातू के लिए कोई गाड़ी नहीं मिली. जिसके बाद दोनों भुरकुंडा स्टेशन से ट्रेन पकड़ कर बरकाकाना स्टेशन गये. वहां से ट्रेन पकड़ कर वापस पतरातू लौटे. लेकिन पतरातू में भी कोई गाड़ी नहीं चल रही थी. इसी चौक पर राजेश भी अपने ससुराल जाने के लिए गोमिया से यहां पहुंचा था. बाद में वह भी पैदल रवाना हो गया.
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