नावाडीह पंचायत का मुख्य मार्ग पांच वर्षों में भी नहीं बन पाया

Published at :26 Oct 2015 10:30 PM (IST)
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नावाडीह पंचायत का मुख्य मार्ग पांच वर्षों में भी नहीं बन पाया

नावाडीह पंचायत का मुख्य मार्ग पांच वर्षों में भी नहीं बन पाया फोटो फाइल संख्या 26 कुजू जी: नावाडीह का मुख्य मार्ग जो नहीं बन पाया, 26 कुजू एच: मुखिया, 26 कु जू आई: रामप्रसाद महतो, 26 कुजू जे: त्रिभुवन प्रसाद, 26 कुजू के: गोपिचंद महतोचैनपुर. मांडू प्रखंड मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी […]

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नावाडीह पंचायत का मुख्य मार्ग पांच वर्षों में भी नहीं बन पाया फोटो फाइल संख्या 26 कुजू जी: नावाडीह का मुख्य मार्ग जो नहीं बन पाया, 26 कुजू एच: मुखिया, 26 कु जू आई: रामप्रसाद महतो, 26 कुजू जे: त्रिभुवन प्रसाद, 26 कुजू के: गोपिचंद महतोचैनपुर. मांडू प्रखंड मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है नावाडीह पंचायत. पंचायत में मुख्यत: महतो(कोयरी), शौडिंक, मांझी, भुइयां, बिरहोर, कुम्हार, गंझू आदि जाति के लोग रहते हैं. यहां पर करीब 2625 मतदाता है. पहले यह पंचायत चैनपुर पंचायत के अंतर्गत था. परंतु वर्ष 2010 में नये परिसीमन में इसे नावाडीह पंचायत में रखा गया. इस पंचायत में चैनपुर, नावाडीह, पंदनाटांड, जरहैया, अर्जुनटांड, चटनिया आदि गांव आते हैं. पिछले पांच वर्षों में देखा जाये, तो पंचायत में विकास के कई कार्य हुए. पंचायत के कई गांवों में मनरेगा योजना से ग्रेड वन पथ बने जिससे गांवों का संपर्क दूसरे गांवों से जोड़ा गया, सिंचाई के लिए मनरेगा से कूप का निर्माण, आपदा प्रबंधन से चापाकल का निर्माण, चैनपुर में जलमीनार का निर्माण, पीसीसी पथ का निर्माण, पेयजल स्वच्छता विभाग से 30 शौचालय का निर्माण, सामुदायिक भवन का निर्माण, पंचायत सचिवालय का निर्माण आदि शामिल हैं. परंतु अभी भी पंचायत में कई समस्याएं है. पंचायत का सबसे मुख्य मार्ग चैनपुर से नावाडीह होते हुए अर्जनटांड तक का मार्ग पूरी तरह से नहीं बना. बिजली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका. पंचायत के कई इंदिरा आवास अभी भी अधूरा है. इसके बावजूद मुखिया की उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. मुखिया विनोद बिहारी महतो के अनुसार पंचायत के 145 लाभुकों को इंदिरा आवास, 337 को वृद्धा पेंशन, सामाजिक, विधवा पेंशन, 7 ट्रांसफर्मर की बदली, चैनपुर डैम का गहरीकरण, जमुनदाहा में चेकडेम का निर्माण, दो विद्यालयों को उत्क्रमित किया जाना, अर्जुनटांड में पुल का निर्माण कर आवागमन को दुरुस्त करना, मनरेगा योजना से पथ बनाकर रामगढ़ व बोकारो जिला को जोड़ना, विकलांगों को व्हीलचेयर दिलाना, 239 किसानों को केसीसी ऋण दिलाना, चैनपुर में पैक्स का निर्माण,162 पंचायत कर ग्रामीणों के मामलों का निपटारा पंचायत में ही करना सहित कई उल्लेखनीय कार्य किये हैं. ईमानदारी से कार्य किया: मुखियापंचायत के मुखिया विनोद बिहारी महतो का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरी ईमानदारी से कार्य किया. पंचायत का विकास करना ही उनकी पहली प्राथमिकता थी. इसमें काफी हद तक उनको सफलता भी मिली. अच्छे कार्य करने के लिए उन्हें उपायुक्त द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया. वहीं राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन द्वारा दिल्ली में अयोजित कार्यक्रम में पूरे रामगढ़ जिला से प्रतिनिधत्व करने वाला वह एकमात्र मुखिया थे. उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास मुख्य सचिव एके प्रभाकर, उत्तरीछोटानागपुर के पंचायती राज निदेशक बबलू मुर्मू, रामगढ़ के तत्कालीन उपायुक्त अमिताभ कौशल ने पंचायत के दौरा करने के दौरान विकास कार्य देखकर उन्हें बधाई भी दिया था. उन्होंने कहा कि वह जनता की अपेक्षाओं पर हमेशा खरा उतरने का प्रयास किया. लेकिन पंचायत को सरकार द्वारा संपूर्ण अधिकार नहीं देने से कई जगह पर उन्हें परेशानी भी हुई. उन्होने कहा कि पंचायत को आदर्श पंचायत का उनका सपना अभी भी अधूरा रह गया. अगर दोबारा अवसर मिला तो अपूर्ण योजनाओं को पूरा करना तथा आदर्श पंचायत बनाना उनकी प्राथमिकता होगी. पंचायत में भ्रष्टाचार बढा: रामप्रसाद महतोगत चुनाव में मुखिया का चुनाव लड़ने वाले रामप्रसाद महतो का कहना है कि पांच वर्षो में पंचायत का जितना विकास होना था वह नहीं हुआ. पंचायत का मुख्य सड़क नहीं बना. इंदिरा आवास अधूरा है. उन्होंने कहा कि मुखिया ने सेवा भाव छोड़कर मुखियागिरी को व्यवसाय बना लिया. जिससे मांडू प्रखंड के 41 पंचायत में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार नावाडीह पंचायत में ही फैला. योजनाओं के लिए अभिकर्ता चयन से लेकर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लिए कार्ड बनाने में मनमानी बरती गयी है. चैनपुर को प्रखंड बनाने को लेकर कभी गंभीर नहीं हुए मुखिया: त्रिभुवन प्रसादपंचायत के त्रिभुवन प्रसाद का कहना है कि मुखिया चैनपुर को प्रखंड बनाने के मुदे पर कभी गंभीर नहीं रहे. जबकि यहां के लोग उनसे इस बात की आस लगाये बैठे थे. उन्होनें कहा कि इसके अलावे सड़क की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ. बिजली अभी भी जर्जर पोल के भरोसे चल रहा है. चटनिया विद्यालय में शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो पायी. जमुनदाहा आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका का चयन नहीं हो सका. योजनाओ को धरातल पर उतारने का काम किया: गोपीचंद महतोगोपीचंद महतो ने कहा कि मुखिया ने किसी भी सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम किया है. उन्होंने सरकारी योजनाओं को पंचायत में अच्छे तरीके से लागू किया.

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