अधिकारी को बंधक बनाने का निर्णय
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Jun 2014 2:02 AM
हाथियों के उत्पात से खौफजदा हैं ग्रामीण, प्रशासन के खिलाफ लोगों में नाराजगी भदानीनगर : पतरातू प्रखंड के सुदूरवर्ती आधा दर्जन से अधिक गांव-टोलों के हजारों लोग हाथियों के उत्पात से पिछले एक सप्ताह से खौफजदा हैं. शाम ढलते ही ग्रामीण अपना घर छोड़ सुरक्षित स्थान पर चले जाते हैं. प्रभावित गांव चिटो के ग्रामीणों […]
हाथियों के उत्पात से खौफजदा हैं ग्रामीण, प्रशासन के खिलाफ लोगों में नाराजगी
भदानीनगर : पतरातू प्रखंड के सुदूरवर्ती आधा दर्जन से अधिक गांव-टोलों के हजारों लोग हाथियों के उत्पात से पिछले एक सप्ताह से खौफजदा हैं. शाम ढलते ही ग्रामीण अपना घर छोड़ सुरक्षित स्थान पर चले जाते हैं. प्रभावित गांव चिटो के ग्रामीणों ने सोमवार को बैठक कर निर्णय लिया कि हम लोगों का हाल जानने के लिए कोई भी बड़ा अधिकारी आज तक गांव नहीं आया.
वन विभाग केवल खानापूर्ति में जुटा है. ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि यदि गांव में कोई अधिकारी आता है, तो उसे बंधक बना लिया जायेगा. उस अधिकारी को हमारे साथ मिल कर रात में हाथी को भगाने का काम करना होगा, ताकि अधिकारी भी यह महसूस कर सकें कि ग्रामीण किस हाल में जी रहे हैं. बैठक में फूलेश्वर गंझू, मनोज कुमार मुंडा, शिवचरण गंझू, शर्मा गंझू, विनोद मुंडा, सीताराम गंझू, विश्वनाथ गंझू, शिवदेव गंझू, सोमर गंझू, परमेश्वर गंझू, कोशिला देवी, देवंती देवी, सुरपति देवी, कुंती देवी, मुनिया देवी, सारो देवी आदि मौजूद थे. हालांकि ग्रामीणों की बैठक के बाद दोपहर में बीडीओ गांव पहुंचे.
वन विभाग से ज्यादा नाराजगी : ग्रामीण वन विभाग से ज्यादा नाराज हैं. ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें ऑफिस बुलाकर केरोसिन के बदले 10 लीटर जला हुआ मोबिल दिया गया. यह सही ढंग से नहीं जलता है. पर्याप्त पटाखे भी नहीं दिये जाते. टॉर्च भी नहीं दिया गया. सूचना देने के बाद अधिकारी मोबाइल तक ऑफ कर लेते हैं. चिटो गांव की रतनी देवी, सरिता देवी व पियासो देवी का घर टूटने के बाद ग्रामीणों ने उन्हें तिरपाल देने की मांग की थी, जिसे उपलब्ध नहीं कराया गया.
दिन में स्कूल, रात में आशियाना: गांव में मौजूद स्कूल में ग्रामीण रात गुजार रहे हैं. कमरे में बच्चे व महिलाएं रहती हैं. जबकि स्कूल की छत पर पुरुष पहरेदारी करते हैं. स्कूल के चारों ओर आग जलायी जाती है. हाथी दिखने पर तब तक हो-हल्ला व रोशनी की जाती है, जब तक हाथी अपना रास्ता नहीं बदल लेते हैं. ग्रामीणों की यही दिनचर्या विगत एक सप्ताह से जारी है.
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