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आस्था का केंद्र है बृद्धखैरा का वेणुगोपाल मंदिर

Updated at : 12 Jan 2025 8:47 PM (IST)
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आस्था का केंद्र है बृद्धखैरा का वेणुगोपाल मंदिर

पलामू जिले के पांडू प्रखंड क्षेत्र के बृद्धखैरा स्थित वेणुगोपाल मंदिर सह मठ परिसर में मकर संक्रांति के अवसर पर पांच दिवसीय मेला लगा.

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पांडू. पलामू जिले के पांडू प्रखंड क्षेत्र के बृद्धखैरा स्थित वेणुगोपाल मंदिर सह मठ परिसर में मकर संक्रांति के अवसर पर पांच दिवसीय मेला का आयोजन किया गया है. 14 जनवरी से मेला शुरू होगा जो पांच दिनों तक चलेगा. मेंला के सफल आयोजन को लेकर गठित समिति के लोग सक्रिय हैं. मेला की तैयारी जोराें पर चल रही है. मेला देखने आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसका विशेष ख्याल समिति रखेगी. आयोजन समिति के लोगों ने बताया कि पांच दिनों तक चलनेवाले इस मेला में बच्चों के मनोरंजन के कई साधन उपलब्ध रहेंगे. मेला के दौरान लोग सर्कस, डिज्नीलैंड, मौत का कुआं, मीना बाजार, जादूगर सहित कई तरह के मनोरंजन के साधनों का लोग भरपूर आनंद उठायेंगे. आयोजन समिति के लोगों ने बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर आयाेजित पांच दिवसीय मेला में काफी भीड़ होती है. इस मंदिर परिसर में पिछले 14 जनवरी 1956 से मकर संक्रांति के अवसर पर मेला का आयोजन होते आ रहा है. मेले में बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश व छत्तीसगढ़ राज्य से भी लोग आते हैं. खैरा महाल क्षेत्र में यह ऐतिहासिक मेला लगता है. मालूम हो कि बृद्धखैरा स्थित वेणुवोपाल मंदिर का नींव 1946 में वैष्णव सम्प्रदाय के श्रेष्ठ संत त्रिदंडी स्वामी जी महाराज की देखरेख लिया गया था. 11 मार्च 1954 को मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ एवं विधि-विधान से राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित की गयी थी. मंदिर के महंत विष्णुचित्त स्वामी ने बताया कि इस मंदिर परिसर में वर्ष में चार बार उत्सव का आयोजन किया जाता है. मकर संक्रांति के अवसर पर पांच दिवसीय मेला, चैत्र मास में रामनवमी उत्सव, भादों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी एवं दीपावली के दूसरे दिन अन्नकूट उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. अन्नकूट उत्सव में 56 प्रकार के व्यंजन का भोग भगवान को लगाया जाता है. मंदिर परिसर में आयोजित सभी उत्सव में आस-पास के गांव के हजारों श्रद्धालु भाग लेतें हैं. उन्होंने बताया कि वेणुगोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण, भू-देवी, गरुड़ जी, हनुमान जी एवं त्रिदंडी स्वामी जी, भगवान पार्षद के साथ जय-विजय की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित हैं. उन्होंने बताया कि झारखण्ड राज्य में इस मंदिर को वैष्णव संप्रदाय में सबसे उच्च स्थान प्राप्त है. यह मंदिर धर्मिक एवं अध्यात्मिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण स्थल है. यह हजारों लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है.

दक्षिण भारतीय शैली का बना है मंदिर का सिंह द्वार:विष्णुचित्त जी

वेणुगोपाल मंदिर सह मठ का महन्त विष्णुचित्त स्वामी ने बताया कि सिंह द्वार काफी आकर्षक है जो दक्षिण भारतीय शैली का बना है और मनमोहक भी है. उन्होंने बताया कि राज्य के किसी वैष्णव सम्प्रदाय के मंदिर में इस तरह का सिंह द्वार नहीं बना है. इस क्षेत्र के लिए यह मंदिर गौरवशाली है. वैष्णव संप्रदाय द्वारा इस मंदिर का संचालन किया जाता है. मंदिर की संपत्ति से जो आय प्राप्त होती है, उसका उपयोग यहां आने वाले संत-महात्माओं की सेवा में किया जाता है.

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