मेदिनीनगर बाजार में सब्जियों की कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड, आलू-प्याज बना सहारा

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मेदिनीनगर बाजार में सब्जियों की कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड, आलू-प्याज बना सहारा

मेदिनीनगर बाजार में सब्जियों की कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड, आलू-प्याज बना सहारा

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मेदिनीनगर ़ तेजी से बढ़ रही महंगाई से आम आदमी त्रस्त है. आर्थिक रूप से संपन्न लोगों पर महंगाई का कोई खास असर नहीं है. लेकिन कमरतोड़ महंगाई से खासकर मध्यम व गरीब वर्ग के लोग काफी परेशान हैं. बेतहाशा बढ़ती महंगाई का सीधा असर लोगों के घर के बजट पर पड़ रहा है.खाद्य पदार्थों, फलों व सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने मध्यम व गरीब वर्ग के लोगों की नींद उड़ा दी है. पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर के बाजार में सब्जी काफी महंगा बिक रहा है. बाजार की स्थिति यह है कि महंगाई के कारण हरी सब्जियां गरीबों की थाली से काफी दूर हो गयी है. आलू व प्याज ही गरीबों का सहारा बना है. गरीब वर्ग के लोग हरी सब्जी के बजाय आलू व प्याज से ही काम चलाने को विवश हैं. मेदिनीनगर के मुख्य बाजार में लाल कोठा से लेकर गल्ला मंडी होते हुए कन्नी राम चौक तक सड़क के किनारे सब्जी की दुकान संचालित होती है. पलामू में सब्जी की खेती बहुत कम होती है. कुछ ग्रामीण नेनुआ, झींगी, भिंडी लेकर बाजार पहुंचते हैं. सब्जी विक्रेता भोलू की माने तो स्थानीय स्तर पर सब्जी की खेती कम होती है. आलू प्याज सहित हरी सब्जियां बाहर से पलामू के बाजार में आती है. बरसात में सब्जियों की खेती कम होती है. इस कारण सब्जी की कीमत में बढ़ोतरी हुई है. रविन्द्र तिवारी, ममता सिंह, राधिका पाठक, बेबी, कविता, छविबाला की माने तो खाद्य पदार्थों व सब्जियों की बढ़ती कीमतों से किचेन का बजट प्रभावित हुआ है. वे लोग जब सब्जी खरीदने मंडी जाते हैं तो बाजार का चक्कर लगाने के बाद ही अपनी बजट के मुताबिक सब्जी की खरीदारी करते हैं. बाजार में सब्जियों के ताजा दाम (रुपए प्रति किलो) सब्जी कीमत (₹) खेखसा 160 फूलगोभी 120 पालक 100 परवल 60 खीरा 60 टमाटर 60 लौकी 40 परोरा 40 बंधा गोभी 40 भिंडी 50 झींगी 50 नेनुआ 50 करैला 50 बोदी 40 कोहड़ा 40 बैगन 30 आलू 20 प्याज 20 रसोई का बिगड़ रहा संतुलन स्थानीय गृहिणियां रविंद्र तिवारी, ममता सिंह, राधिका पाठक, बेबी, कविता और छविबाला बताती हैं कि सब्जी की कीमतों ने घर के किचन का बजट बिगाड़ दिया है. अब वे मंडी में घूम-घूम कर कीमतें देखकर ही खरीदारी करती हैं. कई बार मनपसंद सब्जी नहीं ले पातीं, सिर्फ सस्ती सब्जियों से ही काम चलाना पड़ता है.

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Shailesh Ambashtha

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