पलामू के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज के 5 विभाग में होगी पीजी की पढ़ाई, 20 सीटों पर एडमिशन

Updated at : 24 Mar 2026 12:19 PM (IST)
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Palamu News

पलामू का मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल.

Palamu News: पलामू के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में पांच विभागों में पीजी की पढ़ाई शुरू होगी. 20 सीटों पर एडमिशन के लिए नीट पीजी अनिवार्य है. निरीक्षण पूरा हो चुका है और एनएमसी की मंजूरी के बाद पढ़ाई शुरू होगी. इससे स्थानीय छात्रों को बड़ी सुविधा और अवसर मिलेगा. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू जिले के पोखरहा स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में अब पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) की पढ़ाई शुरू करने की दिशा में बड़ी पहल की गई है. मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए तैयारी तेज कर दी है और जल्द ही यहां विभिन्न विभागों में पीजी कोर्स शुरू किए जाएंगे.

पांच विभागों में 4-4 सीटें

मेडिकल कॉलेज में कुल 20 सीटों पर पीजी में एडमिशन लिया जाएगा. इसमें एनाटॉमी, बायोकेमेस्ट्री, नेत्र विभाग (ऑप्थाल्मोलॉजी), पैथोलॉजी और मेडिसिन शामिल हैं. इन सभी पांच विभागों में चार-चार सीटें निर्धारित की गई हैं. इससे स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

नीट पीजी परीक्षा पास करना अनिवार्य

पीजी में एडमिशन के लिए छात्रों को पहले नीट पीजी परीक्षा पास करनी होगी. जो छात्र इस परीक्षा में सफल होंगे, वही यहां दाखिला ले सकेंगे. सरकार द्वारा चयनित अभ्यर्थियों की सूची मेडिकल कॉलेज को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

तीन साल का होगा कोर्स, बीच में छोड़ने पर जुर्माना

पीजी कोर्स की अवधि तीन साल निर्धारित की गई है. यदि कोई छात्र तीन साल से पहले पढ़ाई छोड़ता है, तो उसे सरकार के नियमों के अनुसार 30 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. यह नियम छात्रों को कोर्स पूरा करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है.

18 मार्च को टीम ने किया निरीक्षण

पीजी कोर्स शुरू करने से पहले निरीक्षण की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है. 18 मार्च को नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और रिम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कॉलेज की सुविधाओं, फैकल्टी और संसाधनों का मूल्यांकन किया गया.

विशेषज्ञ टीम ने किया कॉलेज का दौरा

निरीक्षण टीम में विश्वविद्यालय की ओर से डीन साइंस डॉ गजेंद्र सिंह, डॉ श्रवण कुमार और रिम्स की ओर से डॉ पंकज बोदरा व डॉ रिशी टोप्पो (गुड़िया) शामिल थे. इनके साथ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ जेएस राव भी मौजूद रहे. टीम ने सभी विभागों का जायजा लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

नेशनल मेडिकल काउंसिल को भेजे जाएंगे दस्तावेज

मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बताया कि निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद सभी जरूरी दस्तावेज नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) को भेजे जाएंगे. मंगलवार को कागजात ऑनलाइन भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. एनएमसी की मंजूरी मिलने के बाद ही यहां पीजी की पढ़ाई औपचारिक रूप से शुरू हो सकेगी.

कॉलेज में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध

मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ जक्का श्रीनिवासन राव ने बताया कि जिन पांच विभागों में पीजी की पढ़ाई शुरू की जानी है, उनके लिए सभी जरूरी संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि कॉलेज हर मानक पर खरा उतरेगा और जल्द ही यहां पीजी कोर्स शुरू हो जाएंगे.

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स्थानीय छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

इस पहल से पलामू और आसपास के क्षेत्रों के छात्रों को बड़ा फायदा मिलेगा. अब उन्हें पीजी की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा. इससे क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा का स्तर भी बेहतर होगा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आने की उम्मीद है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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