खराब प्रदर्शन वाले बैंकों में नहीं रखा जाएगा सरकारी पैसा, झारखंड के वित्त मंत्री का बयान

Updated at : 02 Apr 2026 8:39 PM (IST)
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Palamu News

पलामू समाहरणालय में बैठक करते वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर. फोटो: प्रभात खबर

Palamu News: पलामू में बैंकर्स बैठक के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों को चेतावनी दी कि उनमें सरकारी पैसा नहीं रखा जाएगा. कृषि ऋण, केसीसी और सरकारी योजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए सुधार के लिए सख्त निर्देश दिए गए. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: झारखंड के पलामू समाहरणालय सभागार में गुरुवार को आयोजित जिला स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैंकों के प्रदर्शन को लेकर सख्त रुख अपनाया. पलामू डीसी समीरा एस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि, अग्रणी जिला प्रबंधक और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में सरकारी योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई.

साख जमा अनुपात पर नाराजगी

बैठक के दौरान साख जमा अनुपात (सीडी रेशियो), कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और एनआरएलएम जैसी योजनाओं की समीक्षा की गई. वित्त मंत्री ने पाया कि बैंकों का प्रदर्शन लक्ष्य के अनुरूप नहीं है, जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई.

सरकारी धन रखने पर सख्ती, खराब बैंकों को चेतावनी

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट कहा कि जिन बैंकों का प्रदर्शन खराब रहेगा, उनमें सरकारी राशि जमा नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि पलामू जैसे पिछड़े जिले में बैंकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां किसानों, बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की जरूरत है.

जमा-ऋण के बीच बड़ा अंतर, 40.73% ही लोन वितरण

मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पलामू के बैंकों में कुल 12,345 करोड़ 25 लाख रुपये जमा हैं, जबकि इसके मुकाबले केवल 4,213 करोड़ 66 लाख रुपये यानी 40.73% ही ऋण के रूप में वितरित किए गए हैं. इस असंतुलन को लेकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की और सुधार के निर्देश दिए.

कृषि क्षेत्र में गिरती प्रगति पर चिंता

कृषि ऋण के क्षेत्र में भी प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया. वित्तीय वर्ष 2025-26 के नौ महीने बीतने के बावजूद कुल उपलब्धि केवल 30.14% रही, जबकि दिसंबर तिमाही में यह मात्र 6.9% रही. कृषि ऋण लेने वाले लाभुकों की संख्या भी 39 हजार से घटकर 35,260 हो गई, जिसे मंत्री ने गंभीर चिंता का विषय बताया.

केसीसी और पीएमईजीपी योजनाओं की धीमी रफ्तार

किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लक्ष्य के मुकाबले केवल 225 की उपलब्धि दर्ज की गई, जो बेहद कम है. वहीं प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत पूरे जिले में केवल पांच लाभुकों को ऋण दिया गया. मंत्री ने इन योजनाओं में तेजी लाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया.

एनपीए बढ़ने पर चिंता, वसूली पर भी जोर

बैठक में सरकारी योजनाओं के तहत बढ़ते एनपीए (नन-परफॉर्मिंग असेट्स) पर भी चिंता जताई गई. वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को सिर्फ ऋण वितरण ही नहीं, बल्कि उसकी वसूली पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए. इससे बैंकिंग प्रणाली मजबूत होगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी.

नए बैंक ब्रांच खोलने की मंजूरी

बैठक में जिले के नौ स्थानों पर नए बैंक शाखा खोलने की स्वीकृति दी गई. इनमें हुसैनाबाद के दंगवार में यूको बैंक, मनातू के चक में एसबीआई, डालटनगंज में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, हुसैनाबाद में आईडीबीआई बैंक, नौडीहा बाजार में यूनियन बैंक, पांकी के कसमार में जेआरजीबी, लोहरसी में यूको बैंक और छत्तरपुर के खजूरी नौडीहा में आईडीबीआई बैंक शामिल हैं.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

वित्त मंत्री ने सभी बैंकों को निर्देश दिया कि वे आपसी समन्वय स्थापित कर ग्रामीण क्षेत्रों, महिला समूहों, युवाओं और कमजोर वर्गों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराएं. उन्होंने कहा कि पलामू की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका अहम है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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