मेदिनीनगर : आज तक पेंशनवो न भेंटाइल
Updated at : 05 Aug 2019 9:28 AM (IST)
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अजीत मिश्रा आज भी झोपड़ी में रह रहा है 17 मुसहरों का परिवार, कहा मेदिनीनगर : वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को पक्का मकान दिलाने का लक्ष्य है. इसके लिए सरकार काम कर रही है. इसमें पहले वैसे लोगों को प्राथमिकता मिल रही है, जो अत्यंत गरीब है. लेकिन ऐसे दौर में भी यदि महादलित […]
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अजीत मिश्रा
आज भी झोपड़ी में रह रहा है 17 मुसहरों का परिवार, कहा
मेदिनीनगर : वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को पक्का मकान दिलाने का लक्ष्य है. इसके लिए सरकार काम कर रही है. इसमें पहले वैसे लोगों को प्राथमिकता मिल रही है, जो अत्यंत गरीब है. लेकिन ऐसे दौर में भी यदि महादलित के श्रेणी में आने वाले मुसहर परिवार उपेक्षित हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इन मुसहर परिवारों की सुध कोई क्यों नहीं ले रहा है.
मामला पलामू के नावाबाजार प्रखंड के परिधि में आने वाले पड़वा मोड़ मुसहर टोला की है, जहां 17 मुसहर परिवार पिछले कई वर्षों से रह रहे हैं. लेकिन अभी मुसहर परिवार के लोग जिस हाल में रह रहे हैं, उसे देख कर स्पष्ट हो रहा है कि वजह चाहे जो भी हो, लेकिन मुसहर परिवार के लोग पूर्णत: उपेक्षा के शिकार है. चाहे इसके लिए जिम्मेवार कोई भी हो, पर हकीकत यही है कि जर्जर हो चुके आवास को छोड़कर झोपड़ी बनाकर रहना मुसहर परिवार की विवशता है.
कंप्यूटर व इंटरनेट के युग में जहां प्रगति की बात हो रही है, वहीं पड़वा मोड़ मुसहर टोला में रहने वाले लोग झोपड़ी बना कर रह रहे हैं. ऐसा भी नहीं है, जहां मुसहर परिवार के लोग रह रहे हैं. वह कहीं दूर दराज इलाके में बसा है.
बल्कि मुसहरों का यह टोला एनएच-75 पड़वा – गढ़वा मार्ग के बगल में स्थित है. बताया जाता है कि वर्ष 2005 में पलामू के तत्कालीन उपायुक्त विनय कुमार चौबे ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान मुसहरों की स्थिति को देखा था, जिसके बाद उन्होंने मुसहरों के रहने के लिए 17 आवास का आवंटन किया था. आवास का निर्माण विभागीय तौर पर किया गया था. कहा जाता है कि जब आवास बना, तो उस समय भी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा था. लेकिन जैसे – तैसे भवन का निर्माण कार्य पूरा करा दिया गया.
नतीजा यह हुआ कि भय की साये में मुसहर इस भवन में रात गुजारते रहे. स्थिति यह हुई की भवन गिरने के कारण एक साल पहले उसमें दबकर गिरिवर मुसहर की मौत हो गयी और उसके बाद कोई भी उस घर में रहता नहीं. बरसात के मौसम में झोपड़ी बनाकर मुसहर परिवार के लोग रहते है. इस टोले में जाने पर रजपतिया मुसहरिन से मुलाकात होती है. रजपतिया को लगता है कि कोई सरकारी बाबू आये हैं. बिना जाने बुझे वह एक स्वर में कहती है आज तक पेंशन न भेटाइल, आउ का कहूं. ऐसा दर्द सिर्फ रजपतिया का नहीं है. बल्कि इस टोले में कई ऐसे जरूरतमंद है, जिन्हें सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है.
बालगोविंद मुसहर, सुखदेव मुसहर कहते हैं कि जब घर ही नहीं मिला तो और क्या कहा जाये. सबको पक्का मकान मिल रहा है. लेकिन हम गरीबों को कोई पूछने वाला नहीं है, जैसे-तैसे जीवन की गाड़ी चल रही है. पहले यह कहा जाता था कि मुसहर परिवार के लोग एक जगह पर कहीं टिक कर नहीं रहते. जब मुसहर परिवार के लोगों ने अपने व्यवहार व जीवनशैली में परिवर्तन लाया. एक जगह टिक कर रहने लगे, तो स्थिति यह है कि उन्हें सरकारी सुविधा नहीं मिल रही है. ऐसे में सुलगता सवाल यह है कि ऐसे हालात में गरीबों का भला होगा कैसे? जो मुख्य सड़क के किनारे बसे है. जब वह उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं, तो दूर दराज इलाके में रहने वाले मुसहर परिवारों का दर्द समझा जा सकता है.
शौचालय में गुजारनी पड़ती है रात
मुसहर परिवार झोपड़ी में रहते है. जब तेज बारिश होने लगती है, तो वे लोग बारिश से बचने के लिए शौचालय का सहारा लेना पड़ता है.हाल में ही पड़वा मोड़ के मुसहर टोला में शौचालय का निर्माण कराया गया है, जिसका उपयोग मुसहर परिवार के लोग बरसात में पानी से बचने के लिए करते है.उन लोगों का कहना है कि इसके अलावा उनलोगों के पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है. यह भी शिकायत है कि डीलर द्वारा नियमित रूप से अनाज नहीं दिया जाता. जब मरजी होती है, तब डीलर अपने मन मुताबिक अनाज दे देता है. सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा में अनाज भी नहीं दिया जाता.
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