पीपल के पेड़ को किसने काटा, न स्थानीय लोगों को पता, न विभाग को

Updated at : 21 May 2019 1:48 AM (IST)
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पीपल के पेड़ को किसने काटा, न स्थानीय लोगों को पता, न विभाग को

मेदिनीनगर : पर्यावरण की रक्षा की बात हो रही है. पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है. वन विभाग वनों की सुरक्षा को लेकर सजग व सक्रिय होने का दावा करता है. लेकिन विभाग की सक्रियता की पोल तब खुल गयी, जब मेदिनीनगर नगर निगम इलाके में एक पीपल का पेड़ काट दिया […]

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मेदिनीनगर : पर्यावरण की रक्षा की बात हो रही है. पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है. वन विभाग वनों की सुरक्षा को लेकर सजग व सक्रिय होने का दावा करता है. लेकिन विभाग की सक्रियता की पोल तब खुल गयी, जब मेदिनीनगर नगर निगम इलाके में एक पीपल का पेड़ काट दिया गया. न किसी ने इसका विरोध किया और ना ही विभाग को ही इसकी खबर मिली.

सोमवार को जब लोग जुटे, तब तक पेड़ को पूरी तरह से काट कर गिरा दिया गया था. जो पेड़ कटा, वह पीपल का वृक्ष था. पीपल का वृक्ष न सिर्फ पर्यावरणीय दृष्टिकोण से बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है. जो पेड़ काटा गया, वह मेदिनीनगर के श्री सर्वेश्वरी समूह आश्रम रोड सुदना में देवी मंदिर के सामने करीब 25 साल से लगा हुआ था.
सुदना पश्चिमी और पूर्वी इलाके में रहने वाले लोग इस पेड़ का उपयोग श्राद्धकर्म के घंट टांगने के लिए करते थे. जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो श्राद्धकर्म के लिए पीपल के वृक्ष में घंट टांगा जाता है. सुदना ग्रिड के सामने रहने वाले मुखलाल गुप्ता का निधन हुआ है. उनके परिजनों द्वारा उस पेड़ में घंट टांगा गया था, इसके बाद भी उस पेड़ को काट दिया गया.
पेड़ को काटने वाले कौन है, इसके बारे में आसपास के लोग भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं है. इससे यह समझा जा रहा है कि पेड़ काटने वाला कोई न कोई दबंग व्यक्ति ही है, जिसके खिलाफ मुंह खोलने से लोग डर रहे है. इधर पीपल का पेड़ कटने के बाद लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है.
लोगों ने उपायुक्त को आवेदन देकर इस पूरे मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. मांग करने वालों में वार्ड संख्या दो कि पार्षद सुशीला कुमारी, पूर्व मुखिया सत्येंद्र तिवारी, धीरेंद्र पांडेय, अशोक ओझा, प्रवीण रंजन सिंह, मनोज सिंह, निराला पांडेय, बबलू उपाध्याय, राकेश पाठक, धनंजय पांडेय, संजय कुमार, अजेस कुमार सिंह, दुर्गा प्रसाद आदि का नाम शामिल है. नियम के मुताबिक रैयती प्लॉट में भी हरा वृक्ष को काटने से पहले वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है.
क्या इस मामले में किसी ने विभाग से अनुमति ली थी. क्योंकि जहां पेड़ लगा था, वह जमीन रियाडा व पीडब्लूडी की है. इसके बारे में जब वन विभाग से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो डीएफओ कुमार आशीष फोन पर मिले ही नहीं. प्रधान सहायक को फोन किया गया, तो साहब ही कुछ बता पायेंगे. ऐसे में सुलगता सवाल यह है कि जब शहर के मुख्य मार्ग पर हरे पेड़ काट लिये जा रहे है. कोई रोकने वाला नहीं तो ग्रामीण इलाकों में वनों की सुरक्षा कैसे हो रही होगी.
एक तरफ पर्यावरण की रक्षा की बात तो दूसरी तरफ खुलेआम पेड़ काटा जाना जो हमारे जीवन में आक्सीजन देने का काम कर रहे हैं. हालात ऐसे रहे तो पलामू और तपेगा. अभी जल स्तर नीचे जा रहा है. पारा 45 डिग्री तक पहुंच चुका है. यदि इसके बाद हम सभी पेड़ पौधों के प्रति यह उदासीन रवैया रखेंगे और मनमाने पूर्ण तरीके से अपने स्वार्थ के लिए पेड़ काटेंगे तो निश्चित तौर पर आने वाला कष्ट कर होगा ही.
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