मानसिक अशक्तता व्यक्ति भी मौलिक स्वतंत्रता के हकदार हैं : पीडीजे

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डालसा की ओर से मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक दिव्यांग व्यक्ति के हित में कानूनी सेवा योजना के तहत दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया.

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पाकुड़ कोर्ट. डालसा की ओर से मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक दिव्यांग व्यक्ति के हित में कानूनी सेवा योजना के तहत दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण में नवगठित कानून सेवा इकाई अभिविन्यास के सदस्य शामिल हुए. कार्यक्रम का शुभारंभ पीडीजे सह डालसा के अध्यक्ष शेषनाथ सिंह ने किया. इस अवसर पर पीडीजे ने कहा कि मानसिक रूप से बीमार और मानसिक अशक्तता से ग्रस्त व्यक्ति सभी मानवीय अधिकार और मौलिक स्वतंत्रता के हकदार हैं. उनके हित में यह सुनिश्चित की जाए कि वह अपने मानवीय अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता का पूर्ण और समान आनंद ले सकें. मानसिक अशक्तता ग्रस्त व्यक्तियों का उत्पीड़न सहित शोषण की रोकथाम करने में सहायता करनी चाहिए. उन्होंने शोषकों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने समेत कई जानकारी दी. इस दौरान उन्होंने नवगठित कानूनी सेवा इकाई के सदस्यों को मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को चिह्नित कर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन या डालसा पाकुड़ को सूचना देने की बात कही. मौके पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय के सुधांशु कुमार शशि, स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार शुक्ला, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम, क्रांति कुमार प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिल्पा मुर्मू, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार, सचिव अजय कुमार गुड़िया आदि मौजूद थे.

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