अमड़ापाड़ा की घटना ने उड़ायी पुलिस की नींद

Updated at : 10 Mar 2016 3:51 AM (IST)
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अमड़ापाड़ा की घटना ने उड़ायी पुलिस की नींद

नक्सलियों के खिलाफ पुलिस चला रही छापेमारी अभियान एलआरपी के लिए रवाना होते एसएसबी के जवान पूछताछ के लिए थाना में रखे गये कंपनी के दो नाइट गार्ड पाकुड़ : जिले के अमड़ापाड़ा थाना के रांगा गांव के समीप हुई घटना ने पुलिस की नींद उड़ा दी है. पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ छापेमारी […]

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नक्सलियों के खिलाफ पुलिस चला रही छापेमारी अभियान

एलआरपी के लिए रवाना होते एसएसबी के जवान
पूछताछ के लिए थाना में रखे गये कंपनी के दो नाइट गार्ड
पाकुड़ : जिले के अमड़ापाड़ा थाना के रांगा गांव के समीप हुई घटना ने पुलिस की नींद उड़ा दी है. पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ छापेमारी अभियान चला रही है. बांसलोई नदी पर एमएस इस्लाम कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बनाये जा रहे पुल योजना स्थल पर मंगलवार की रात करीब 12 बजे नक्सली संगठन पीएलजी के 8-10 अपराधियों ने नाइट गार्ड के साथ मारपीट कर मोबाइल, घड़ी व रुपये छिने जाने तथा वहां रखे कुछ कीमती सामानों को आग के हवाले कर दिये जाने की घटना ने पुलिस महकमा की नींद उड़ गयी है.
एसपी अजय लिंडा के नेतृत्व में काफी संख्या में पुलिस बल अमड़ापाड़ा के विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सघन छापेमारी अभियान चला रहे हैं. कंपनी के नाइट गार्ड से भी पुलिस पूछताछ करने में जुटी है. हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी भी नक्सली संगठन द्वारा यह घटना को अंजाम नहीं दिया गया है. स्थानीय अपराधियों द्वारा ही घटना को अंजाम दिये जाने की आशंका पुलिस द्वारा व्यक्त की जा रही है.
कहीं मार्च क्लोजिंग का चक्कर तो नहीं : सूत्रों की मानें तो मार्च 2016 तक राज्य भर में कई बड़े-छोटे योजनाओं को पूरा किया जाना है. ऐसे में मार्च 2016 तक कई कंपनियों द्वारा कार्य पूरा नहीं किये जाने की स्थिति में रूपये की कटौती का भय रहता है. साथ ही समय पर कार्य पूरा नहीं किये जाने पर कंस्ट्रक्शन कंपनी के ब्लैक लिस्टेड होने की भी संभावना बनी रहती है. मार्च में कार्य पूरा नहीं होने की स्थिति में है, ठीक इसी समय पर नक्सलियों के नाम पर केवल लाठी-डंडा व चाकू से लैस हो कर अपराधियों द्वारा घटना को अंजाम देकर क्षेत्र में दहशत का माहौल बनाया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है.
पुलिस पदाधिकारियों की भी मानें तो पुलिस इस बिंदु पर भी अनुसंधान शुरू कर दी है. जानकार लोगों का मानना है कि नक्सलियों द्वारा घटना को अंजाम दिये जाने की स्थिति में संवेदक द्वारा योजना पूर्ण कराये जाने को लेकर सरकार से अतिरिक्त समय की मांग करते हैं.
सरकार भी ऐसी स्थिति में संवेदक को अतिरिक्त समय देने को मजबूर होते हैं, और इसका सीधा लाभ संवेदक को मिलता है. बहरहाल एमएस इस्लाम कंस्ट्रक्शन कंपनी के योजना स्थल पर भी मार्च में ही इस तरह की घटना को अंजाम अपराधियों द्वारा दिये जाने के बाद क्षेत्र में कई सवाल खड़े हो गये हैं, जो पुलिस के लिए एक जांच का विषय है.
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