अवैध खनन करने वालों पर नहीं होती कार्रवाई

Updated at : 27 May 2015 8:21 AM (IST)
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अवैध खनन करने वालों पर नहीं होती कार्रवाई

नियमों को ताक पर रख कर किया जाता है उत्खनन पाकुड़ : जिले में पत्थर खनन का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है और इसमें गड़बड़ घोटाला भी उतना ही पुराना है. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण तत्कालीन सहायक खनन पदाधिकारी विभूति कुमार के पत्रंक 204 से मिलता है. उल्लेखनीय है कि विभिन्न कारणों जैसे पट्टा परिसमाप्त, […]

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नियमों को ताक पर रख कर किया जाता है उत्खनन
पाकुड़ : जिले में पत्थर खनन का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है और इसमें गड़बड़ घोटाला भी उतना ही पुराना है. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण तत्कालीन सहायक खनन पदाधिकारी विभूति कुमार के पत्रंक 204 से मिलता है. उल्लेखनीय है कि विभिन्न कारणों जैसे पट्टा परिसमाप्त, परित्यक्त, नवीनीकरण आदि लंबित मामले वाले पट्टों पर अब तक खनन कार्य हो रहा है.
जबकि सहायक खनन पदाधिकारी उक्त पत्रंक के अनुसार ऐसे पट्टों पर अवैध खनन करने का आवेदन देते हुए पाकुड़ नगर थाना प्रभारी, मुफस्सिल, मालपहाड़ी, महेशपुर, रद्दीपुर, पकुड़िया एवं हिरणपुर थाना के प्रभारियों को नजर रखने एवं अवैध खनन पर प्राथमिकी दर्ज करने की बात लिखी है. सुदूर क्षेत्रों की बात छोड़ दें तो पाकुड़ जिला मुख्यालय से बिल्कुल सटे हुए मालपहाड़ी, कालीदासपुर, कान्हूपुर, कसीला आदि जगहों पर खुलेआम अवैध उत्खनन, अवैध विस्फोटक का प्रयोग एवं अवैध परिचालन चल रहा है.
आश्चर्य तो इस बात का है कि जिला खनन कार्यालय द्वारा प्रेषित उक्त पत्र पर अब तक किसी भी थाना प्रभारी ने एक भी शिकायत या प्राथमिकी दर्ज नहीं की है. जबकि उक्त पत्र में पट्टाधारी, मौजा, प्लॉट संख्या, लीज क्षेत्र का एरिया, समय सीमा एवं पट्टा देने की तिथि अंकित है.
बावजूद इसके किसी तरह की कार्रवाई नहीं होना अपने-आप में पुलिस के कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न् खड़ा करता है. दूसरी ओर आश्चर्य इस बात का है कि स्वयं तत्कालीन सहायक खनन पदाधिकारी ने जो सूची थाना प्रभारियों को उपलब्ध कराई है. उनके कार्यकाल में अवैध खनन होता रहा है. लेकिन उन्होंने उस पर आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की? अपने आप में सवालिया निशान खड़ा कर रहा है.
क्या है खनन के नियम
खनन पट्टा निर्गत करने के समय डीड में खनन नियमों का उल्लेख रहता है, जिसके अंतर्गत मोटे तौर पर खनन क्षेत्र के चारों तरफ बैरिकेटिंग कर घेराबंदी करना, वृक्षा रोपण करना, खनन एवं क्रशर एरिया में आठ घंटे लगातार जल छिड़काव करने सहित कई नियमों का पालन करना होता है.
इसके साथ ही खदान की खुदाई पांच फुट के बेंच नुमा करने का प्रावधान है. लेकिन इन सब नियमों को ताक पर रख कर खनन किया जाता है. तत्कालीन सहायक जिला खनन पदाधिकारी के पत्रंक 876 दिनांक 23.07.2014 के अनुसार पाकुड़ अंचल में 95, हिरणपुर अंचल में 61 तथा महेशपुर में 19 जगहों पर संबंधित थाना प्रभारियों को नजर बनाये रखने का निर्देश दिया गया था.
क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक अनूप बिरथरे ने बताया कि पुलिस अपने स्तर से हर संभव कार्रवाई करती है. सहायक खनन पदाधिकारी द्वारा जब भी सहायोग के लिये पुलिस की मांग की जाती है उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जायेगी.
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