शहर में नहीं है ऑटो पड़ाव
Updated at : 24 Jul 2016 9:08 AM (IST)
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बीच सड़क पर यात्रियों को बैठाते हैं ऑटोवाले आये दिन यात्रियों से होती है तू-तू मैं-मैं लोहरदगा : लोहरदगा जिला में करीब एक हजार ऑटो रिक्शा का परिचालन होता है, लेकिन ऑटो रिक्शा के लिए एक भी पड़ाव नहीं है. बीच सड़क पर ही ऑटो वाले यात्रियों को बैठाते और उतारते हैं, जिससे आये दिन […]
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बीच सड़क पर यात्रियों को बैठाते हैं ऑटोवाले
आये दिन यात्रियों से होती है तू-तू मैं-मैं
लोहरदगा : लोहरदगा जिला में करीब एक हजार ऑटो रिक्शा का परिचालन होता है, लेकिन ऑटो रिक्शा के लिए एक भी पड़ाव नहीं है. बीच सड़क पर ही ऑटो वाले यात्रियों को बैठाते और उतारते हैं, जिससे आये दिन जाम की समस्या से उत्पन्न होती है. लोहरदगा में परिवहन विभाग में निबंधित 461 ऑटो रिक्शा के अलावा दूसरे जिलों से निबंधित ऑटो रिक्शा चल रहे हैं. इधर, जब से रांची-लोहरदगा ट्रेन का परिचालन शुरू हुआ है, तब से लोहरदगा में अप्रत्याशित रूप से ऑटो की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन परेशानी इस बात की है कि पूरे लोहरदगा शहर में कही भी ऑटो रिक्शा के लिए एक पड़ाव तक नहीं है.
ऑटो चालक बीच सड़क पर ही यात्रियों को बैठाते और उतारते हैं. इससे कई बार जाम लग जाता है. सड़क जाम होने पर कई बार तू-तू-मैं-मैं की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. रांची से जो यात्री ट्रेन से लोहरदगा पहुंचते हैं, इनमें अधिकतर लोग ऑटो से ही घाघरा, कुडू व किस्को तक जाते हैं. इसके अलावा नगजुआ रेलवे स्टेशन, अकाशी रेलवे स्टेशन व इरगांव रेलवे स्टेशन में भी बड़ी संख्या में ऑटो खड़े रहते हैं, जो सवारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाते हैं. ग्रामीण इलाकों में भी काफी संख्या में ऑटो रिक्शा का परिचालन होता है. इधर, जब से लोहरदगा में ऑटो रिक्शा का चलना शुरू हुआ, तब से शहर से रिक्शा लगभग गायब हो गया है.
हाल के दिनों में नगर पर्षद अध्यक्ष पावन एक्का ने करीब 100 रिक्शा का वितरण किया है. पड़ाव के संबंध में पूछे जाने पर नगर पर्षद अध्यक्ष श्री एक्का ने बताया कि शहर में ऑटो रिक्शा स्टैंड के लिए नगर पर्षद द्वारा कई स्थान चिह्लित किये गये हैं. ऑटो यूनियन द्वारा इस मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण ऑटो रिक्शा स्टैंड अब तक नहीं बन पाया है. उन्होने कहा कि ऑटो रिक्शा स्टैंड बनाना मेरी प्राथमिक सूची में है और इसे शीघ्र ही अमली जामा पहनाया जायेगा.
वहीं ऑटो यूनियन के मनोज साहू का कहना है कि शहर में सैकड़ों की संख्या में ऑटो रिक्शा चलते हैं. नगर पर्षद को मोटी राशि इससे राजस्व के रूप में प्राप्त होती है, लेकिन यहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. सवारी उतारने के लिए सड़क किनारे आॅटो लगाने पर पुलिस परेशान करती है. इस व्यवसाय से हजारों लोगों की रोजी रोटी चल रही है. इसके बावजूद ऑटो चालकों को कोई सुविधा नहीं दी जा रही है.
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