ओके :3:::: ईख की मिठास से तीन परिवार हुआ खुशहाल

Published at :02 Aug 2014 8:01 PM (IST)
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ओके :3::::   ईख की मिठास से तीन परिवार हुआ खुशहाल

फोटो- एलडीजीए- 2 ख्ेात मंे लहलहाता ईख की खेती.लोहरदगा. मेहनत एवं सच्ची लगन के साथ कृषि कार्य में भी जुटा जाये तो व्यक्ति आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बन कर सम्मानित जीवन जीने योग्य हो जाता है. ऐसा ही उदाहरण किस्को प्रखंड के परहेपाट निवासी जियाउल अंसारी, लतीफ अंसारी एवं शकील अंसारी ने कायम किया है. पूर्व […]

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फोटो- एलडीजीए- 2 ख्ेात मंे लहलहाता ईख की खेती.लोहरदगा. मेहनत एवं सच्ची लगन के साथ कृषि कार्य में भी जुटा जाये तो व्यक्ति आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बन कर सम्मानित जीवन जीने योग्य हो जाता है. ऐसा ही उदाहरण किस्को प्रखंड के परहेपाट निवासी जियाउल अंसारी, लतीफ अंसारी एवं शकील अंसारी ने कायम किया है. पूर्व में इन तीनों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. किसी तरह परिवार चला रहे थे. इसी बीच तीनों ने मिल कर ईख लगाने की सोची. शुरुआती दिनों में बड़ी कठिनाई के साथ किसी प्रकार दो एकड़ जमीन में ईख की खेती की. ईख बड़े बाजारों एवं जतरा, मेला में बेच कर अच्छा मुनाफा कमाया. इसके बाद तीनों एक साथ रह कर ईख की खेती का निर्णय लिया और आज सफल किसान बन कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं. तीनों ने इस वर्ष 10 एकड़ जमीन में ईख लगाया है. खेतों में ईख लहलहा रहा है. इस वर्ष की कमाई से तीनों कुछ बड़े काम करने की सोच रखे हैं. पहले तो ये लोग ईख को मेले, बाजारों में बेचते थे, लेकिन इस बार ईख की उत्पादकता को देख कर इन्होंने एक भी ईख बाजारों में नहीं बेचने का निर्णय लिया है. इन किसानों के पास अभी से ही खरीदार पहुंचने लगे हैं. तीनों को उम्मीद है कि इस बार ईख से अच्छी कमाई हो जायेगी. भुखमरी से मिली निजातइस संबंध में किसान जियाउल अंसारी का कहना है कि लगभग 14-15 वर्ष पूर्व इनके परिवार के समक्ष भुखमरी की स्थिति थी. बड़ी मुश्किल से पहली बार सबों ने मिल कर खेती किया था, लेकिन समय बदला, आज इनके पास घर में सारी सुविधा उपलब्ध है. बच्चों को भी पढ़ाने-लिखाने की बेहतर सोच इनमें आयी हैं. 20 एकड़ में करेंगे ईख की खेती किसान शकील अंसारी का कहना है कि मेहनत कर कमाने में सुकून मिलता है. वह कहता है कि खेती-बारी कर वह कभी थकान महसूस नहीं करता. बीती बातों को याद कर वह कहता है कि उस समय की बात ही कुछ और थी. आज परिवार अमन चैन, सुख व शांति के साथ है. यही खुशकिस्मती है. जियाउल अंसारी का कहना है कि हम लोग के पास समस्याओं का अंबार था. तीनों ने जब से ईख की खेती शुरू किये, शुरुआती दौर मे परेशानियां भी आयीं. लेकिन दो एकड़ से दस एकड़ में खेती लगाने के लायक हो गये हैं. इस बार अच्छा मुनाफा हुआ तो हमलोग एकजुटता के साथ अगली बार 15 से 20 एकड़ जमीन मे ईख लगाने का प्रयास करेंगे.

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