अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष को विद्रोह कहने की परंपरा खत्म हो
Updated at : 30 Jun 2019 12:30 AM (IST)
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हूल दिवस पर सेमिनार लोहरदगा : बीएस कॉलेज के इतिहास विभाग में हूल दिवस के पूर्व संध्या पर सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार में मुख्य अतिथि कॉलेज के पूर्व प्राचार्य लोहरा उरांव उपस्थित थे. कार्यक्रम का शुभारंभ शहीद सिदो-कान्हो के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. मौके पर कंजीव लोचन ने […]
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हूल दिवस पर सेमिनार
लोहरदगा : बीएस कॉलेज के इतिहास विभाग में हूल दिवस के पूर्व संध्या पर सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार में मुख्य अतिथि कॉलेज के पूर्व प्राचार्य लोहरा उरांव उपस्थित थे. कार्यक्रम का शुभारंभ शहीद सिदो-कान्हो के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. मौके पर कंजीव लोचन ने कहा कि कोल विद्रोह, भूमिज विद्रोह, संथाल विद्रोह आदि शब्द अंग्रेज यूज करते थे. उनकी नजरों में हम विद्रोह जरूर करते थे, बागी थे, जबकि सच्चाई यह है कि हम संघर्ष करते थे.
अतः सही शब्द कोल संघर्ष, भूमिज संघर्ष या संथाल संघर्ष होना चाहिए. हमें विद्रोह कहने की व्यापक परिपाटी को चुनौती देनी होगी. मौके पर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य लोहरा उरांव ने कहा कि हूल दिवस केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं था, बल्कि समाज के हर तरह के शत्रुओं के खिलाफ था. अन्याय के खिलाफ एकजुटता और प्रतिरोध का संकल्प ही हूल दिवस का सबसे बड़ा संदेश है. मौके पर निखिल कुमार ने कहा कि हूल प्रतिरोध और रचनात्मकता के समन्वय का आंदोलन है.
संथाल हूल ने केवल उपनिवेशवादी शोषण का मुकाबला नहीं किया बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए भी उद्यम किया था. मौके पर शिक्षक कंजीव लोचन, निखिल कुमार, छात्रा नीलम, उषा मिंज, रामेश्वर, राहुल, पूनम, शगुफ्ता, रईस, इकबाल, शमशाद आदि उपस्थित थे.
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