न्यू बस स्टैंड कुड़ू : आमदनी 25 लाख, सुविधा नदारद
Author Prabhat khabar digital desk
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साफ-सफाई का ख्याल नहीं, जिला परिषद के लिए दुधारू गाय बना बस स्टैंड कुड़ू : जिला परिषद लोहरदगा द्वारा संचालित डा भीम राव अांबेडकर चौक सह न्यू बस स्टैंड कुड़ू जिला परिषद के लिए दुधारू गाय साबित हो रहा है़ बस स्टैंड से जिला परिषद को सलाना लगभग 25 लाख रुपये राजस्व की प्राप्ति होती […]
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साफ-सफाई का ख्याल नहीं, जिला परिषद के लिए दुधारू गाय बना बस स्टैंड
कुड़ू : जिला परिषद लोहरदगा द्वारा संचालित डा भीम राव अांबेडकर चौक सह न्यू बस स्टैंड कुड़ू जिला परिषद के लिए दुधारू गाय साबित हो रहा है़ बस स्टैंड से जिला परिषद को सलाना लगभग 25 लाख रुपये राजस्व की प्राप्ति होती है लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. पेयजल के लिए एक चापाकल लगा है जो नाकाफी साबित हो रहा है.
बस स्टैंड स्थापना काल के समय बना यात्री शेड बद से बदतर हालत में पहुंच गया है. छत पर लगा एस्बेस्टस शीट एक साल से टूटा पड़ा है़ अपने गंतव्य को जाने के लिए बस पकड़ने कुड़ू पहुंचने वाले यात्री चिलचिलाती धूप से बचने के लिए भटकते फिर रहे हैं.
बस स्टैंड में गंदगी चारों तरफ बिखरी पड़ी है. साफ-सफाई का कोई ख्याल नहीं है. बस स्टैंड को टेंपो स्टैंड बना दिया गया है़ नतीजा यात्री वाहन बीच सड़क पर खड़े होकर यात्रियों को उतारते तथा चढ़ाने को विवश है़ं नतीजा सड़क जाम होने की समस्या आम हो गयी है. आम यात्रियों की समस्याओं से न तो प्रखंड प्रशासन, न ही जिला परिषद और ना ही जिला प्रशासन को कोई सरोकार है. नतीजा यात्री परेशान रहते हैं.
1989 में बना है बस स्टैंड, मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं, हर साल होती है राजस्व में बढ़ोत्तरी : बस स्टैंड कुड़ू की स्थापना वर्ष 1989 में की गयी. स्थापना काल के समय एक यात्री शेड, चापाकल लगाया गया है. यात्री शेड की हालत खास्ता है. यात्री शेड का फर्श पूरी तरह टूट गया है. कुड़ू बस स्टैंड से राज्य के एक दर्जन जिले गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, लातेहार, मेदनीनगर, गढ़वा, चतरा, रांची, खूंटी, हजारीबाग, कोडरमा समेत अन्य जिले के लिए यात्री वाहन रोजाना आते-जाते हैं.
इसके अलावा बिहार, बंगाल, ओड़िशा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उतरप्रदेश समेत अन्य राज्यों के लिए यात्री वाहन चलती है. सुबह पांच बजे से रात आठ बजे तक यात्री वाहनों का परिचालन रहता है. रात आठ बजे के बाद कई प्रदेशों के मालवाहक वाहन कुड़ू होकर रातभर चलते हैं. बस स्टैंड में अंतिम यात्री वाहन रात लगभग नौ बजे आती है. बस स्टैंड में विद्युत लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है. नतीजा शाम ढलते ही यहां असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं. बस स्टैंड में लगे दुकानों में चोरी से लेकर यात्रियों से बदसलूकी तथा छिनतई की घटना शुरू हो जाती है. कई बार महिला यात्रियों से बदसलूकी की घटना हो चुकी है. बस स्टैंड में एक दर्जन होटल संचालित है.
सभी होटलों से जिला परिषद हर माह राजस्व वसूलता है. एकमात्र चापाकल पर हमेशा जमघट लगा रहता है. होटलों में पानी देने वाले मजदूरों तथा यात्रियों के बीच हमेशा पानी लेने को लेकर तू- तू,मैं-मैं होते रहती है. जिला परिषद के कार्यप्रणाली से दुकानदारों से लेकर यात्रियों में काफी आक्रोश व्याप्त है. इस संबध में न तो जिला परिषद न ही प्रंखड प्रशासन कुछ बोलने को तैयार है. सबसे बड़ी बात यह है कि जनता के सेवक कहे जाने वाले विधायक, सांसद सह केंद्रीय मंत्री से लेकर पंचायत चुनाव से चुन कर आये जनप्रतिनिधि भी आमजनों, यात्रियों की समस्याओं से बेपरवाह हो चुप्पी साधे हैं.
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