बंडा पुल, अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र और आइटीआइ कॉलेज बन सकता है चुनावी मुद्दा

Updated at : 03 Apr 2019 1:25 AM (IST)
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बंडा पुल, अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र और आइटीआइ कॉलेज बन सकता है चुनावी मुद्दा

कैरो : प्रखंड क्षेत्र के लोग आज भी सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी और जनप्रतिनिधियों के छलावे से यहां के ग्रामीण उच्च शिक्षा ग्रहण के निमित्त बना इंजीनियरिंग कॉलेज, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बना अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र एवं अधूरा पड़ा बंडा पुल […]

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कैरो : प्रखंड क्षेत्र के लोग आज भी सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी और जनप्रतिनिधियों के छलावे से यहां के ग्रामीण उच्च शिक्षा ग्रहण के निमित्त बना इंजीनियरिंग कॉलेज, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बना अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र एवं अधूरा पड़ा बंडा पुल के कारण जिला मुख्यालय से नजदीक का लाभ नहीं उठा पाना चुनावी मुद्दा बन सकता है.

करोड़ों रुपये की लागत से बना एड़ादोन कोयल नदी तट पर आइटीआइ कॉलेज और छात्रावास दिखावे की वस्तु बन कर रह गयी है. निर्माण के बाद से अब तक भवन का उपयोग नहीं होना लोगों के लिए पहेली बनी हुई है. उक्त भवन का निर्माण बिल्डिंग डिवीजन द्वारा वर्ष 2012-13 में कराया गया था. ग्रामीणों का कहना है कि भवन निर्माण हुए वर्षों गुजर जाने के बाद भी आइटीआइ की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाना यहां के जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये को उजागर करता है.
जिले के भंडरा प्रखंड और कैरो प्रखंड को जोड़नेवाला बंडा पुल का निर्माण वर्ष 2007-08 में 85 लाख की लागत से कराने का निविदा हुई थी. जो एक दशक बीत जाने के बाद भी अधूरा है. संवेदक द्वारा पुल निर्माण के लिए नदी में दो पिलर का निर्माण कराने के पश्चात अधूरा छोड़ दिया गया. जबकि इस पुल के निर्माण हो जाने से जिले के दो प्रखंडों कैरो व भंडरा के लोगों का सीधा जुड़ाव जिला मुख्यालय से सुलभ हो जाता.
वहीं 2010-11 में कंदनी नदी तट पर एक करोड़ 11 लाख की लागत से अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन निर्माण के बाद से अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र असामाजिक व शरारती तत्वों का ठिकाना बन कर रह गया है. वर्तमान में अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र जीर्ण-शीर्ण अवस्था में खुद बीमार साबित हो रहा है. कैरो प्रखंड को प्रकृति ने जीविकोपार्जन के अनेक साधन उपलब्ध करायी है.
लेकिन यहां के लोग मेहनतकश होने के बाद भी राजनीतिक जन प्रतिनिधियों के उपेक्षा का दंश झेलने को विवश हैं. प्रखंड में विकास केनाम पर लूट खसोट की परिपाटी हमेशा से हावी रही है. इसी की बानगी है कोयल नदी के तट पर निर्माण कराया गया आइटीआइ भवन जिसमें बरसात के दिनों भवन के चारों ओर जलजमाव हो जाने के कारण आईटीआई कॉलेज टापू बन जाता है.
अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गया है वहीं क्षेत्र की चिरप्रतिक्षित जरूरत जिला मुख्यालय से जोड़नेवाला बंडा पुल आज भी विभागीय पेंच में फंस कर अधूरा पड़ा है. क्षेत्र से पढ़ाई करने के लिए लोहरदगा आने वाले छात्रों का कहना है की कैरो से जिला मुख्यालय की दूरी 35 किमी है.
रांची की दूरी 65 किमी एवं कुडू प्रखंड मुख्यालय की दूरी 15 किमी है. अगर बंडा पुल के बन जाता, तो जिला मुख्यालय की दूरी काफी कम हो जाती. उसी तरह बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के मद्देनजर मरीजों को ले जाने में भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. लोगों का कहना है कि जरूरी काम से गांव से बाहर जाना होता है तो 18 किमी के स्थान पर 35 किमी दूरी तय करनी पड़ती है.
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