ePaper

व्यायामशाला के भरोसे बालूमाथ की सेहत, करोड़ों खर्च के बाद भी पिलर से आगे नहीं बढ़ा काम

Updated at : 07 Jan 2026 10:27 PM (IST)
विज्ञापन
व्यायामशाला के भरोसे बालूमाथ की सेहत, करोड़ों खर्च के बाद भी पिलर से आगे नहीं बढ़ा काम

व्यायामशाला के भरोसे बालूमाथ की सेहत, करोड़ों खर्च के बाद भी पिलर से आगे नहीं बढ़ा काम

विज्ञापन

बालूमाथ़ बालूमाथ प्रखंड में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का मामला सिस्टम की विफलता और राजनीतिक खींचतान का जीवंत उदाहरण बन गया है. आलम यह है कि पिछले 21 वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च होने और दो-दो बार शिलान्यास के बावजूद अस्पताल को अपनी छत नसीब नहीं हो सकी. आज भी प्रखंड की स्वास्थ्य सेवाएं एक ””””व्यायामशाला”””” के भरोसे चल रही हैं, जबकि बेहतर इलाज जनता का मौलिक अधिकार है. 2003 में शुरू हुई थी पहली कोशिश, जर्जर हो गया अर्द्धनिर्मित ढांचा : मामला 22 साल पुराना है, जब थाना परिसर के सामने करीब पौने दो एकड़ में फैला पुराना स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत था. वर्ष 2003 में तत्कालीन विधायक प्रकाश राम की पहल पर 3.5 करोड़ रुपये की लागत से 40 बेड के नये अस्पताल की नींव रखी गयी. तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने इसका शिलान्यास किया. नये भवन के मोह में पुराने खूबसूरत सरकारी क्वार्टरों और बंगलेनुमा भवन को जमींदोज कर दिया गया. दावा था कि एक वर्ष में काम पूरा होगा, लेकिन निर्माण के नाम पर सिर्फ राशि की हेराफेरी हुई और भवन का ढांचा अर्द्धनिर्मित अवस्था में ही जर्जर होकर रह गया. दूसरी बार 10 करोड़ की लागत से हुआ शिलान्यास, फिर भी काम अधूरा : वर्ष 2023 में तत्कालीन विधायक बैद्यनाथ राम ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया और अपनी ही सरकार के विरुद्ध धरने पर बैठे. इसके बाद प्रखंड कार्यालय परिसर में अस्पताल बनाने का नया प्रस्ताव पारित हुआ. करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से दूसरी बार निविदा निकली और रोहित इंफ्रा (रांची) को निर्माण की जिम्मेदारी मिली. 17 दिसंबर 2023 को दूसरी बार शिलान्यास हुआ. एक साल बीतने को है, लेकिन संवेदक ने महज पिलर ही खड़े किये हैं. पिछले एक साल से काम पूरी तरह बंद है और विभाग मौन साधे बैठा है. बदहाली का दंश : मशीनों में लग रही जंग, मरीज हो रहे रेफर : अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि अपना भवन नहीं होने के कारण कीमती मशीनें रखरखाव के अभाव में खराब हो रही हैं. कमरों की भारी कमी है, जिसके कारण मरीजों को भर्ती करना या उनका ऑपरेशन करना संभव नहीं है. मामूली केस में भी मरीजों को सदर अस्पताल या रिम्स रेफर करना डॉक्टरों की मजबूरी बन गयी है. सियासत का शिकार : हार-जीत के फेर में लटका भविष्य : स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अस्पताल पूरी तरह राजनीति की भेंट चढ़ चुका है. पिछली बार शिलान्यास करने वाले विधायक चुनाव हार गये, जिससे योजना की प्राथमिकता खत्म हो गयी. अब वर्तमान विधायक प्रकाश राम का कहना है कि संवेदक कम दर पर काम लेकर उसे अधूरा छोड़ देते हैं. उन्होंने घोषणा की है कि वे इस मामले को फिर से विधानसभा में उठायेंगे और उपायुक्त से मिलकर पुराने अस्पताल परिसर में ही नया भवन बनाने की मांग करेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
SHAILESH AMBASHTHA

लेखक के बारे में

By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola