बच्चों के लिए वरदान है कुपोषण उपचार केंद्र

Updated at : 24 Aug 2016 12:00 AM (IST)
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बच्चों के लिए वरदान है कुपोषण उपचार केंद्र

2010 से जुलाई 2016 तक कुल 685 बच्चों का हुआ सफल इलाज बच्चे का इलाज करानेवाले अभिभावक को रोज के मिलते हैं 100 रुपये चंदवा : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित कुपोषण उपचार केंद्र, चंदवा कुपोषित बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है. बच्चों के अभिभावक इलाज में लगी एएनएम को आशीर्वाद दे रहे हैं. […]

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2010 से जुलाई 2016 तक कुल 685 बच्चों का हुआ सफल इलाज

बच्चे का इलाज करानेवाले अभिभावक को रोज के मिलते हैं 100 रुपये

चंदवा : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित कुपोषण उपचार केंद्र, चंदवा कुपोषित बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है. बच्चों के अभिभावक इलाज में लगी एएनएम को आशीर्वाद दे रहे हैं. इस केंद्र का उदघाटन वर्ष 2010 में किया गया था. उस वक्त लातेहार जिले में यह पहला केंद्र था.

2010 के बाद से जुलाई 2016 तक यहां कुल 685 बच्चे भरती किये गये. सभी कुपोषित बच्चे तंदुरुस्त होकर वापस घर गये. इस केंद्र में चंदवा के अलावा बालूमाथ, हेरहंज, बारियातू व आस-पास के क्षेत्रों से कुपोषित बच्चे इलाज को आते हैं.

रविवार को भी इस केंद्र में शिवा नाम का डेढ़ वर्ष का कुपोषित बच्चा भरती कराया गया. बच्चे की मां सुनीता देवी व पिता सकिंद्र कुमार (कीता, सेरक) ने बताया कि जन्म के समय इसका वजन ढाई किग्रा था. धीरे-धीरे वजन घटता गया. अब यह डेढ़ किग्रा का हो गया है.

एएनएम ने बताया कि शिवा को भरती कर लिया गया है. 20-25 दिन में उसके सेहत में सुधार होगी. यहां बच्चों को उनकी पसंद का खाना समय-समय पर दिया जाता है. दवाइयों का खर्च भी सरकार वहन करती है. यही नहीं बच्चे के साथ रहने वाले एक अभिभावक को प्रतिदिन के हिसाब से 100 रुपये भी दिये जाते हैं.

दिन-रात लगी रहती है चार एएनएम

कुपोषण उपचार केंद्र चंदवा में चार एएनएम की ड्यूटी है. इनमें यशोदा कुमारी, तरसीला तिर्की, बिबियानी खलखो, अंजू सिन्हा के अलावा दैनिक मजदूर जशींता तिर्की कार्यरत हैं. ये दिन-रात बच्चों की सेवा में लगी रहती हैं. ये बच्चों को नियमित दवाई देती रहती हैं. बच्चों की खुराक पर विशेष ध्यान दिया जाता है. केंद्र की देख-रेख चिकित्सक डॉ निर्मला शांति लकड़ा करती हैं.

नीरज व अनुराग की स्थिति में सुधार

केंद्र में कार्यरत एएनएम ने बताया कि नीरज कुमार (लछीपुर, बालूमाथ) व अनुराग कुमार (अंबवाटांड़, हुटाप-चंदवा) भी कुपोषण से पीड़ित थे. इन्हें करीब 15 दिन पहले यहां भरती कराया गया था. इनकी स्थिति भी शिवा के जैसी ही थी. इनकी हालत में लगातार सुधार है.

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