झारखंड की सांस्कृतिक विरासत है सरहुल

Updated at : 09 Apr 2019 1:23 AM (IST)
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झारखंड की सांस्कृतिक विरासत है सरहुल

प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें लातेहार : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विष्णुकांत सहाय ने कहा कि सरहुल न सिर्फ प्रकृति की पूजा है वरन झारखंड की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर है. यह धरोहर मानव-सभ्यता, संस्कृति एवं पर्यावरण की धुरी है. श्री सहाय सरना समिति लातेहार के तत्वावधान में आयोजित सरहुल पर्व महोत्सव को संबोधित […]

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प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें

लातेहार : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विष्णुकांत सहाय ने कहा कि सरहुल न सिर्फ प्रकृति की पूजा है वरन झारखंड की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर है. यह धरोहर मानव-सभ्यता, संस्कृति एवं पर्यावरण की धुरी है. श्री सहाय सरना समिति लातेहार के तत्वावधान में आयोजित सरहुल पर्व महोत्सव को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सरहुल हमें प्रकृति की रक्षा का संदेश देता है.
उन्होंने इस अवसर पर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वन किया. समिति के अध्यक्ष हरदयाल भगत ने कहा कि सरहुल बसंत के मौसम में जब साल के पेड़ की शाखाओं पर नये फूल खिलते हैं, तब मनाया जाता है. यह गांव के देवता की पूजा है. इन देवताओं को जनजातियों का रक्षक माना जाता है. देवताओं की पूजा साल की फूलों से की जाती है.
मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी गणेश रजक ने कहा कि सरहुल पर्व आपसी सौहार्द का पर्व है. इस पर्व में पूरा गांव पारंपरिक गीत व नृत्य से सरोबार रहता है. इससे पहले कार्यक्रम से पहले अतिथियों को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया. मौके पर पारंपरिक गीत व नृत्य प्रस्तुत किया गया.
सरहुल पर आयोजित शोभा यात्रा का शुभारंभ प्रधान जिला जज श्री सहाय एवं अपर जिला जज द्वितीय ने मांदर बजा कर किया. मौके पर डॉ मनीष लाल, थाना प्रभारी नरेश कुमार, प्रखंड प्रमुख अशोक सिंह, जिला परिषद सदस्य आशा देवी व विनोद उरांव, पड़हा समिति के अध्यक्ष रामदयाल उरांव, डॉ एच हांसदा, बिरसा मुंडा, रंथु उरांव, अफताब आलम, संतोष पासवान समेत ग्रामीण क्षेत्र के काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.
मांदर की थाप पर थिरके अतिथि : सरहुल पर्व पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान विष्णुकांत सहाय समेत सभी अतिथि मांदर बजा कर ग्रामीणों के संग थिरके. इस दौरान श्री सहाय ने कहा कि ऐसे पर्वों से प्रेम और आपसी भाईचारा और प्रगाढ़ होता है.
दो किलोमीटर लंबी थी शोभा यात्रा : सरना समिति द्वारा सरहुल के मौके पर निकाली गयी शोभा यात्रा तकरीबन दो किलोमीटर लंबी थी. इस शोभा यात्रा में लातेहार समेत आसपास के दर्जनों गांव के हजारों लोगों ने भाग लिया. इस दौरान महिलाओं के समूहों द्वारा पारंपरिक नृत्य किये गये. सरहुल पर्व को लेकर शहर के कई चौक चौराहों पर स्टॉल लगा कर पानी, शर्बत एवं बिस्कुट आदि का वितरण किया गया.
शोभा यात्रा के दौरान हुई भारी बारिश
लातेहार. सरना समिति के तत्वावधान में सोमवार को सरहुल शोभा यात्रा के दौरान अचानक बारिश होने लगी. इससे थोड़ी देर के लिए सड़क पर अफरा तफरी मच गयी. लोग सड़क के किनारे बने दुकानों में छिप कर खुद को भीगने से बचाया. जुलूस आदिवासी बासाओड़ा से निकल कर थाना चौक पहुंची और इसके बाद वापस आ रही थी. इसी क्रम में तेज बारिश
शुरू हो गयी.
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