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शहर में वेडिंग सीजन गरम, रॉयल फैशन की चमक से बाजार गुलजार

Updated at : 03 Dec 2025 9:00 PM (IST)
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शहर में वेडिंग सीजन गरम, रॉयल फैशन की चमक से बाजार गुलजार

शादियों की शहनाई और हल्की ठंड के साथ ही बाजारों की रौनक चरम पर है.

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प्रतिनिधि, झुमरीतिलैया शादियों की शहनाई और हल्की ठंड के साथ ही बाजारों की रौनक चरम पर है. इस बार वेडिंग फैशन में पुराना शाही अंदाज जोरदार वापसी कर रहा है. ग्राहक बजट से ज्यादा कपड़ों की गुणवत्ता और कारीगरी को प्राथमिकता दे रहे हैं. पशमीना, वेलवेट, हैंडएम्ब्रायडरी और हैवी बनारसी की चमक बाजार में साफ दिख रहा है. महिलाओं में प्योर पशमीना सूट, भारी जरदोशी वर्क और एवरग्रीन बनारसी साड़ियों की जबरदस्त मांग है. वहीं, माडर्न ट्रेंड चाहने वालों के लिए शरारा, गाउन, नेट और जिम्मी सिल्क की काफी मांग है. डिजाइनर कपड़ों के विक्रेता विपुल चौधरी बताते हैं कि सगाई और शादी के लिए गाउन व लहंगे खूब पसंद किये जा रहे हैं. उनके यहां 3 हजार से लेकर 15 हजार रुपये तक लहंगे उपलब्ध हैं. इसके अलावा शर्कवाली ड्रेस, सिंगल, टू-पीस और थ्री-पीस ड्रेसेस की भी अच्छी बिक्री हो रही है. व्यवसायी ने बताया कि शादी सीजन के चलते मार्केट में अच्छी खासी रौनक है. झुमरी तिलैया के स्टेशन रोड ,जैन गली मार्ग ,रांची पटना रोड के कपडा दुकानों के लहंगे, सूरत की साड़ियां और कलकत्ता की अनारकली सूट ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं. कोलकाता के हैंडवर्क सूट और मुंबई के शरारे भी खूब बिक रहे हैं. इस समय उनके शोरूम में 5 हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक के लहंगे उपलब्ध हैं. जबकि सिल्क साड़ियों की रेंज 1 हजार से 15 हजार रुपये तक और शिफान-फैंसी साड़ियों की कीमत एक से 10 हजार रुपये के बीच है. कारोबारियों ने बताया कि ठंड के मौसम में वेलवेट, माइक्रो फैब्रिक और प्योर पशमीना की बिक्री तेज है. पशमीना सूट सात से 10 हजार रुपये और बनारसी साड़ियां 2,500 रुपये तक में उपलब्ध हैं. लखनवी जरदोजी और कश्मीरी कढ़ाई का आकर्षण भी इस सीजन फैशन को विशेष बना रहा है.

ऑनलाइन ऑफर बनाम ऑफलाइन संतुष्टि

ऑनलाइन के साथ साथ ऑफलाइन में भी लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं. दुकानों पर लगी भीड़ बता रही है कि लोग अब सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि कपड़े को छूकर उसकी क्वालिटी देखना चाहते हैं. खरीदारी करने आई पूनम सेठ ने बताया घर में शादी है इसलिए बहुत सारी खरीदारी करनी है. आनलाइन में आफर्स की भरमार तो है पर दुकानों पर देखकर खरीदने में जो संतुष्टि मिलती है वह कही नहीं है. देखकर खरीदने का भरोसा कहीं नहीं मिलता.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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