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झारखंड राज्य गठन का सपना अभी नहीं हुआ है साकार

Updated at : 12 Nov 2025 7:39 PM (IST)
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झारखंड राज्य गठन का सपना अभी नहीं हुआ है साकार

झारखंड राज्य गठन के 25वर्ष पूरे होने पर राज्य में पूरे उल्लास और उमंग के साथ रजत जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है.

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आदिवासी और मूलवासियों के बीच प्रभात खबर ने कराई परिचर्चा ———————————– गौतम राणा, कोडरमा बाजार. झारखंड राज्य गठन के 25वर्ष पूरे होने पर राज्य में पूरे उल्लास और उमंग के साथ रजत जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है. झारखंड गठन के रजत जयंती पर प्रभात खबर द्वारा आयोजित किए जा रहे संवाद की शृंखला के तहत कोडरमा जिला मुख्यालय में आदिवासी और मूलवासियों के बीच परिचर्चा करायी गयी. परिचर्चा में व्यवसायी, शिक्षाविद्, झारखंड आंदोलनकारी, युवा और समाजसेवी शामिल हुए और अपनी बातों को रखा. झारखंडियों की सरकार में खूब दौड़ा है विकास का पहिया : पवन जिला आदिवासी संघ के अध्यक्ष पवन माइकल कुजूर ने कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर झारखंड अलग राज्य बना वह उद्देश्य अभी भी अधूरा है. आज भी हमारे समाज के लोग बड़ी संख्या में मुख्यधारा से कटे हुए हैं. हालांकि, राज्य गठन के बाद विकास के कई उल्लेखनीय कार्य हुए हैं. जब-जब झारखंडियों की सरकार बनी है तब-तब राज्य में विकास का पहिया खूब दौड़ा है. रोजगार के अभाव में पलायन जारी : विनय सिंह समाजसेवी विनय सिंह ने कहा कि राज्य गठन के बाद विकास के कार्यों में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन रोजगार की समस्या अब भी सबसे बड़ा समस्या है. श्री सिंह ने कहा कि कोडरमा समेत पूरे राज्य में पत्थर, कोयला, ढिबरा, अभ्रक समेत अन्य खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने इस पर गंभीरता से कार्य नहीं किया. खनिज पदार्थों के लिए स्पष्ट पॉलिसी नहीं होने के कारण राज्य के युवा रोजगार के अभाव में दूसरे राज्यों की ओर पलायन को मजबूर हैं. राज्य गठन के शुरुआती दौर में विकास के कई कार्य हुए : बेदु साव समाजसेवी बेदु साव ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था. अलग झारखंड की मांग को लेकर आयोजित राज्यस्तरीय आर्थिक नाकेबंदी में उनके साथ 46 लोग गिरफ्तार भी हुए थे. उन्होंने कहा कि राज्य गठन के शुरुआती वर्ष में जिस तेजी से विकास कार्यों को धरातल पर उतारने का कार्य किया गया था यदि वही रफ्तार अभी भी रहता तो झारखंड एक विकसित राज्य की श्रेणी में होता. झारखंड आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है : दीपक नवीन दीपक नवीन ने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सम्पूर्ण झारखंड में विकास के कार्य किये जा रहे है. राज्य सरकार के कल्याणकारी योजनाओं खास कर मंईयां सम्मान योजना से झारखंड की आधी आबादी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है. सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के माध्यम से योग्य लाभार्थियों और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है. जो मुख्यधारा से दूर हैं, उन्हें शामिल करने की जरूरत है : विनोद उरांव विनोद उरांव ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया था वह अभी तक पूरा नहीं हुआ. आज भी आदिम जनजाति की एक बड़ी आबादी मुख्यधारा से कटे हुए हैं. कल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं, जब तक उन्हें मुख्यधारा में शामिल नहीं किया जाता तब तक राज्य गठन का उद्देश्य अधूरा है. श्री उरांव ने कहा कि सदर अस्पताल में इतनी सुविधाओं के बावजूद साधारण बीमारी में भी मरीजों को रांची रेफर कर दिया जाता है तो कल्पना कीजिये कि ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का क्या हाल होगा ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही है. वह पूरी गम्भीरता के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है. झारखंड सिंगापुर बन सकता है : राजू पासवान राजू पासवान ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी अकूत खनिज संपदा है. इसके बावजूद भी यहां के युवाओं को रोजगार की तलाश में विभिन्न राज्यों में भटकना पड़ रहा है. राज्य गठन के 25वें वर्षगांठ पर हमलोग रजत जयंती मना रहे हैं, मगर जिस उद्देश्य से राज्य का गठन हुआ वह पूरा होता नजर नहीं आ रहा है. राज्य में इतनी खनिज संपदा है कि यदि राज्य सरकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ ठोस नीति बनाये तो झारखंड सिंगापुर बन सकता है. यहां रोजगार की कमी नहीं होगी. राज्य गठन के बाद विकास कार्यों में गति पकड़ा है : नरेश मंडल झारखंड अलग राज्य आंदोलन के आंदोलनकारी नरेश मंडल ने कहा कि कहा कि जब हमारा झारखंड अभिभाजित बिहार में था तो उस समय उम्मीद के मुताबिक छोटानागपुर में आशातीत विकास कार्य पूरी तरह से नहीं हो रहा था. झारखंडियों को अलग पहचान ,हक और अधिकार के साथ साथ सम्पूर्ण विकास के लिए झारखंड को अलग करने की मांग उठी उस आंदोलन में राज्य के हर वर्ग के लोगों ने अपनी भूमिका निभायी और अंततः झारखंड अलग राज्य बना. सरकारी नौकरियों में स्पष्ट नियमावली की जरूरत है : जितेंद्र कुमार जितेंद्र कुमार ने कहा कि राज्य गठन के बाद हर युवावर्ग को उम्मीद थी कि सरकारी नौकरियों में बहाली होगी, मगर ठोस नियमावली और स्पष्ट नीति के अभाव के कारण जो भी बहाली निकाली जाती है वह विवादों में पड़ कर न्यायालय के में चली जाती है, जिससे युवावर्ग में मायूसी है. वर्तमान सरकार से उम्मीद है कि यहां के युवाओं के लिए ठोस रणनीति बनाये, नियमित बहाली निकालें ताकि यहां के युवाओं का सपना साकार हो. पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने की जरूरत : प्रवीण कुमार प्रवीण कुमार ने कहा कि कोई भी सरकार शतप्रतिशत युवाओं को सरकारी नौकरी नही दे सकता है ,लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो शतप्रतिशत युवावर्ग रोजगार पा सकते हैं ,झारखंड के कोने कोने में प्रकृति ने एक से बढ़कर एक पर्यटन क्षेत्र उपहार में दिया है ,यदि इन पर्यटन क्षेत्रों को गम्भीरतापूर्वक विकसित किया जाय तो युवाओं की एक बड़ी आबादी रोजगार पा सकते हैं। ओबीसी वर्ग के छात्र छात्राओं को छात्रवृत्ति का लाभ मिले : रंजन कुमार रंजन कुमार ने कहा कि एक ओर पूरा राज्य झारखंड स्थापना दिवस के 25वें वर्षगांठ को रजत जयंती के जश्न में मग्न है लेकिन दूसरी ओर ओबीसी वर्ग के पोस्ट मैट्रिक छात्र छात्राओं को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है. राज्य सरकार से अनुरोध है कि कल्याण विभाग से पोस्ट मैट्रिक की मिलने वाली छात्रवृत्ति में जो अड़चने आ रही है उसे अविलंब दूर करे और गरीब मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति की राशि प्रदान करे ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके. मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से युवा बन रहे हैं आत्मनिर्भर : कैलाश प्रसाद राज्य सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है. मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना से जहां एक ओर कोडरमा समेत राज्य के युवक युवतियां आत्मनिर्भर बन रही है तो दूसरी ओर मैय्या सम्मान योजना से महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है. हर क्षेत्र में गंभीरता से कार्य करने की जरूरत : नारायण यादव नारायण यादव ने कहा कि राज्य गठन के बाद सपना था कि यहां के युवाओं को रोजगार की कमी नही होगी, परंतु वह सपना पूरी तरह साकार नहीं हुआ. लोग नौकरी और रोजगार के लिए भटकने को मजबूर हैं, राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में गम्भीरता से कार्य करें तो झारखंड गठन का सपना साकार हो सकता है. ड़क हादसे पर ठोस कदम उठाने की जरूरत : शंकर प्रसाद शंकर प्रसाद ने कहा कि कोडरमा घाटी की सड़कें सही नहीं होने के कारण आये दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, जिससे असमय लोगों की जाने चली जाती है. राज्य सरकार और जिला प्रशासन को इस ओर गम्भीरता से ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि डेंजर जॉन के नाम से विख्यात कोडरमा घाटी में लोग सुगमतापूर्वक यात्रा कर सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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