बिरहोरों को प्रशिक्षण के नाम पर लाखों का गबन

Updated at : 17 Sep 2015 8:57 AM (IST)
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बिरहोरों को प्रशिक्षण के नाम पर लाखों का गबन

कोडरमा : जिले की आदिम जनजातियों के स्तर को बढ़ाने व जीविकोपार्जन के लिए सीसीडी योजना के अंतर्गत जिला कलयाण विभाग व एनजीओ की मिलीभगत से लाखों रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया है. मामले का खुलासा पीएलबी तुलसी कुमार साव की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी के […]

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कोडरमा : जिले की आदिम जनजातियों के स्तर को बढ़ाने व जीविकोपार्जन के लिए सीसीडी योजना के अंतर्गत जिला कलयाण विभाग व एनजीओ की मिलीभगत से लाखों रुपये के गबन का मामला प्रकाश में आया है. मामले का खुलासा पीएलबी तुलसी कुमार साव की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी के बाद हुआ है़
आरटीआइ के तहत दिये गये जवाब में बिरहोरों को प्रशिक्षण दिये जाने का जिक्र है. पर ऐसा कोई भी प्रशिक्षण बिरहोर टोला में नहीं दिया गया.
कल्याण विभाग की ओर से जिले के चार बिरहोर टोला में इस योजना के तहत 32 लाख रुपये से विभिन्न प्रशिक्षण दिया जाना है़ लोकाई बिरहोर टोला का जो दस्तावेज उक्त अधिनियम के तहत दिया गया है, उसमें बताया गया है कि 65 बिरहोरों को मुर्गी पालन, बकरी पालन, शूकर पालन का 20 दिवसीय प्रशिक्षण रांची के एनजीओ द्वारा दिया गया है. इसके लिए कुल खर्च आठ लाख 2100 रुपये दिखाया गया है. इसमें एक लाख 95 हजार स्टाइपेंड के रूप में 24 हजार कोऑर्डिनेटर व स्टेशनरी, रांची एक्सपोजर खाना आदि में राशि के खर्च करने का जिक्र है, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ है. लोकाई के बिरहोरों सहित पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, आंगनबाड़ी सेविका सहित अन्य ने इस मामले की उच्चस्तरीय की जांच की मांग की है.
बिरहोरों ने भी मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, आदिवासी कल्याण आयुक्त, आयुक्त हजारीबाग, उप निदेशक कल्याण आयुक्त हजारीबाग व उपायुक्त कोडरमा को आवेदन देकर कल्याण विभाग के पदाधिकारी व तथाकथित रांची के एनजीओ पर कार्रवाई करने व ट्रेनिंग व अन्य सुविधा देने की मांग की है.
आवेदन में कहा गया है कि आरटीआइ के तहत पता चला है कि प्रशिक्षण हो गया है और हम सभी को तीन तीन हजार रुपये स्टाइपेंड के रूप में दिया गया है और रांची ले जाकार घुमाया भी गया है. ऐसा बिल वाउचर बता रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि हम लोगों को न ट्रेनिंग मिली है और न ही रांच ले जाया गया.
हममें से कुछ से 50-50 रुपये देकर बहला फुसलाकर अंगूठा का निशान भी लगाया गया. आवेदन में पप्पू बिरहोर, मालो बिरहोरनी, मंगर बिरहोर, बहादुर साव, चमारी साव, मनोज साव, बालेश्वर राम, तुलसी कुमार साव, सुमा बिरहोरनी, जीतन बिरहोर, कोल्हा बिरहोर, गुटा बिरहोर, मेघनी बिरहोर, आशा बिरहोर, मसो शांति बिरहोरिन आदि के हस्ताक्षर हैं.
प्रशिक्षण का उदघाटन हुआ पर नहीं दिया गया प्रशिक्षण
उपायुक्त को सौंपे गये ज्ञापन में यह भी बताया गया कि लोकाई में शूकर पालन, बकरी पालन व मुर्गी पालन के लिए प्रशिक्षण का उदघाटन तथाकथित एनजीओ के प्रतिनिधि व जिला कल्याण पदाधिकारी अजीत निरल सांगा ने किया था.
प्रशिक्षण के उदघाटन के दिन कहा गया था कि आज से लगातार 15 से 20 दिन ट्रेनिंग दी जायेगी. ट्रेनिंग के बाद, बकरी, मुर्गी, सुअर आदि भी दिये जायेंगे पर न आज तक ट्रेनिंग मिली और न ही किसी प्रकार की कोई सुविधा .
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