विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति ने समीक्षा बैठक के दौरान पकड़ी

Updated at : 23 Jul 2015 8:45 AM (IST)
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विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति ने समीक्षा बैठक के दौरान पकड़ी

कोडरमा : जिले में इंदिरा आवास योजना व अन्य विकास योजनाओं में लूट मची है. बुधवार को स्थानीय परिसदन में अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति के अध्यक्ष व सदस्य विधायकों ने ऐसी ही गड़बड़ी पकड़ी. समिति ने पाया कि जिले में तीन वर्ष के दौरान 6200 इंदिरा आवास के एवज […]

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कोडरमा : जिले में इंदिरा आवास योजना व अन्य विकास योजनाओं में लूट मची है. बुधवार को स्थानीय परिसदन में अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान विधानसभा की प्रत्यायुक्त समिति के अध्यक्ष व सदस्य विधायकों ने ऐसी ही गड़बड़ी पकड़ी. समिति ने पाया कि जिले में तीन वर्ष के दौरान 6200 इंदिरा आवास के एवज में सिर्फ 2200 आवास ही पूरा हुआ है. 4000 इंदिरा आवास योजना के संबंध में सही से रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं है.
जिले में नियम के अनुकूल काम हो रहा है या नहीं, इसकी जांच व जानकारी लेने के लिए समिति के चेयरमैन व विधायक अरुप चटर्जी, विधायक राजकुमार यादव व शशिभूषण समाद बुधवार को यहां पहुंचे हुए थे.
समिति ने परिसदन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. समिति ने बैठक में एनआरइपी, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, पथ निर्माण, भू अजर्न, भू राजस्व, मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा, वन विभाग के अलावा पीएचइडी व एनआरएलएम योजना की समीक्षा की व वर्तमान स्थिति से अवगत हुई. समीक्षा के दौरान गड़बड़ी पाये जाने पर समिति ने अधिकारियों को फटकार लगायी.
इंदिरा आवास योजना में गड़बड़ी की बात डीडीसी केके ठाकुर ने स्वीकार करते हुए कहा कि इसमें किस स्तर से लापरवाही हुई है, यह जांच के बाद सामने आयेगा.
उन्होंने कहा कि सभी इंदिरा आवास को पूर्ण कराया जायेगा. समित के सदस्यों ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन माह का समय देते हुए इसके लिए डीडीसी केके ठाकुर व स्पेशल डिवीजन को जांच का आदेश दिया है. समिति के सदस्य राजकुमार यादव ने कहा कि इंदिरा आवास का रिकार्ड नहीं मिलना बड़ा घोटाला है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2010-11, 2011-12 व 2013-14 की रिपोर्ट में पूर्ण इंदिरा आवास का जिक्र तो है, पर अन्य इंदिरा आवास की राशि आवंटित होने के बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा कि आदेश दिया गया है कि अगर इसका पता नहीं चलता है, तो पहले पैसा रिकवरी का प्रयास करें फिर सर्टिफिकेट केस करें. उन्होंने कहा कि गलत पाये जाने पर इस मामले में पंचायत सेवक, जेइ व बीडीओ पर भी कार्रवाई होगी.
हालांकि डीडीसी का कहना था कि फॉलो अप नहीं करने के कारण ऐसा हुआ है. इसे सुधारने का प्रयास होगा.
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