कोडरमा : जिसके गर्भ में बताया था कन्या भ्रूण, उसने पुत्र को दिया जन्म

Updated at : 02 Jul 2019 7:16 AM (IST)
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कोडरमा : जिसके गर्भ में बताया था कन्या भ्रूण, उसने पुत्र को दिया जन्म

27 मई को डॉ सीमा को किया गया था गिरफ्तार कोडरमा : भ्रूण जांच के आरोप में गिरफ्तार डाॅ सीमा ने जिस डिकॉय (प्रलोभन देनेवाली) महिला को बताया था कि उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण कन्या का है. उसी महिला सुप्रिया कुमारी ने बीती रात डोमचांच रेफरल अस्पताल में पुत्र को जन्म देकर प्रशासनिक […]

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27 मई को डॉ सीमा को किया गया था गिरफ्तार

कोडरमा : भ्रूण जांच के आरोप में गिरफ्तार डाॅ सीमा ने जिस डिकॉय (प्रलोभन देनेवाली) महिला को बताया था कि उसके गर्भ में पल रहा भ्रूण कन्या का है. उसी महिला सुप्रिया कुमारी ने बीती रात डोमचांच रेफरल अस्पताल में पुत्र को जन्म देकर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठा दिया है.

डोमचांच के नावाडीह गांव की रहनेवाली सुप्रिया की नॉर्मल डिलिवरी हुई है. दूसरी ओर इस आरोप में गिरफ्तार धन्वंतरी अल्ट्रासाउंड की संचालिका डाॅ कुमारी सीमा एक माह से ज्यादा समय से न्यायिक हिरासत में है. उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें शनिवार को ही रिम्स में भर्ती कराया गया. वहीं, आइएमए के डॉक्टर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अपनी नैतिक जीत बता रहे हैं.

क्या है मामला : 27 मई को तत्कालीन डीसी बीपी सिंह के निर्देश पर टीम ने धन्वंतरी अल्ट्रासाउंड में छापामारी की थी. टीम ने जिस महिला को डिकॉय बना कर भ्रूण जांच के लिए भेजा था. उस महिला ने बयान में कहा था कि डॉक्टर ने दलाल को यह जानकारी दी थी कि महिला के गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़की का है.

इसके बाद जांच टीम ने अल्ट्रासाउंड मशीन, कागजात जब्त करते हुए डाॅक्टर को हिरासत में ले लिया. 27 मई की देर रात मामला दर्ज कर महिला चिकित्सक को गिरफ्तार कर अदालत में प्रस्तुत किया गया.

डॉ सीमा के पक्ष में उतर आया था आइएमए : डॉ सीमा की गिरफ्तारी के बाद आइएमए के बैनर तले जिले के निजी चिकित्सक विरोध में उतर आये थे. डाॅक्टरों का आरोप था कि एक साजिश के तहत डाॅ सीमा को फंसाया गया है. स्वास्थ्य मंत्री ने भी मामले के जांच के आदेश दिये थे. अभी यह मामला न्यायालय में चल रहा है.

बयान में कहा था लड़की बताया गया, अब कह रही हम क्या करें

प्रभात खबर ने डिकॉय महिला सुप्रिया कुमारी से नावाडीह स्थित उसके घर जाकर बातचीत की. बातचीत में महिला ने बस इतना ही कहा कि अल्ट्रासाउंड के समय जब बताया गया कि गर्भ में लड़की है, तो मुझे लगा कि दुबारा बेटी होगी. उसने कहा कि इस मामले में वह ज्यादा कुछ नहीं जानती है.

महिला से जब पूछा गया कि अब आपको पुत्र हुआ है, तो उसने कहा कि हम क्या करें. उसने किसी तरह के दबाव की बात से इंकार किया. इसके पूर्व इस महिला ने पुलिस को दिये लिखित बयान में कहा था कि मैंने सुना कि डाॅ सीमा ने दलाल अनीशा खातून के कान में धीरे से बताया कि गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़की है.

उसके सहयोगी को बता दो. गर्भवती (यानी मुझे) को यह बात बताने पर रोने लगेगी. इसके बाद दलाल अनिशा ने मेरी सहयोगी संगीता देवी को बताया कि सुप्रिया के गर्भ में लड़की है. मेरी सहयोगी ने उक्त जानकारी मुझे दी.

ऑडियो क्लिप की बातचीत में भी सवाल

इधर, आरोपों में घिरी डाॅ सीमा के पति डाॅ मनोज व कार्रवाई के दिन विशेष तौर पर प्रशासन की ओर से बुलाये गये राजस्थान निवासी राजन चौधरी के बीच हुई बातचीत का ऑडियो क्लिप सामने आया है.

इसमें राजन यह कहते सुने जा रहे हैं कि मैं मानता हूं कि डाॅक्टर साहब ने ऐसा कुछ नहीं किया है. वह अगर मरीज को सिस्टम से लेती और फाॅर्म एफ भरवाती तो कुछ नहीं होता. कुछ कमियों के कारण डाॅ सीमा लपेटे में आयी. उस दिन कार्रवाई को लेकर डीसी पर बहुत प्रेशर था.

आप डीसी से नहीं मिलिए, जो भी होगा कोर्ट से होगा. मैं आपकी जरूरत पड़ने पर मदद करूंगा. केस में दम नहीं है. किसी के कहने पर मान लिया जाये, ऐसा नहीं होता है. कोर्ट की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, यही सजा है. आप पहले जमानत कराइए. राजन यह भी कह रहे हैं कि आपके दिन अच्छे नहीं थे. आपके यहां नहीं आना था. राहत के यहां जाना था, पर पैसा लेकर वहां से आदमी गायब हो गया. इस ऑडियो क्लिप में अन्य कई तरह की बातें हैं.

सज उजागर हुआ, जांच अधिकारियों पर हो कार्रवाई : आइएमए

इधर, आइएमए कोडरमा के सचिव डाॅ सुजीत कुमार राज ने कहा कि जिस महिला को आधार बना कर यह डिकाॅय आपरेशन किया गया, उसने लड़के को जन्म दिया. अब इस घटनाक्रम का सच उजागर हो चुका है. यही नहीं जांच करनेवाले अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़ा होता है.

आइएमए सरकार से मांग करती है कि डॉ सीमा को अविलंब आरोप मुक्त करे तथा जांच में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो. एक तरह से डॉक्टर्स डे के अवसर पर हम डॉक्टरों को नैतिक जीत मिली है.

क्या है डिकॉय ऑपरेशन

स्वास्थ्य विभाग ने वैसे अल्ट्रासाउंड केंद्र जहां चोरी-छिपे भ्रूण लिंग जांच की जाती है, उन्हें सबूत के साथ पकड़ने की कार्रवाई को डिकॉय ऑपरेशन का नाम दिया है.

डिकॉय ऑपरेशन के तहत फर्जी कस्टमर बना कर चिह्नित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भेजा जाता है. इसमें ऐसी गर्भवती स्त्री को कस्टमर बनाया जाता है, जिसकी बेटियां पहले से हो. गर्भवती महिला को अल्ट्रासाउंड केंद्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक फोन भी दिया जाता है, जिसमें ट्रैकिंग डिवाइस लगी होती है.

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