रोजे की हालत में इंसान फरिश्ता बन जाता है
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 May 2019 12:58 AM
जयनगर : रमजान में हर बंदे की दुआ कुबूल होती है. रोजा हर अकीदतमंद को रखना फर्ज है. शुक्रवार को दूसरे जुम्मे की नमाज अदा कराने के बाद मस्जिद के इमामों ने कहा कि हदीस पाक में यह जिक्र आता है कि रमजान के मुकद्दस महीने में प्रत्येक रात में सुबहे सादिक आसमान से एक […]
जयनगर : रमजान में हर बंदे की दुआ कुबूल होती है. रोजा हर अकीदतमंद को रखना फर्ज है. शुक्रवार को दूसरे जुम्मे की नमाज अदा कराने के बाद मस्जिद के इमामों ने कहा कि हदीस पाक में यह जिक्र आता है कि रमजान के मुकद्दस महीने में प्रत्येक रात में सुबहे सादिक आसमान से एक मुनादी यह ऐलान करता है. अच्छाई मांगने वाले यह मांगना खत्म कर और खुशी मना कि तेरी दुआ कुबूल हो गयी है. बुराई करनेवाले बुराई करने से बाज आ और इबरत हासिल कर.
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