खूंटी के छाता गांव में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का अभाव, महिलाओं ने उठाई मांग

खूंटी के पंचायत संसाधन एवं सूचना केंद्र में बाल कल्याण संघ की बैठक के बाद छाता गांव की महिलाएं. फोटो: प्रभात खबर
Khunti News: खूंटी जिले के छाता गांव में महिलाओं ने स्ट्रीट लाइट और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग उठाई. बाल कल्याण संघ की बैठक में पीआरए प्रक्रिया के तहत गांव की समस्याओं का आकलन किया गया. महिलाओं ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने की मांग की. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
खूंटी से चंदन कुमार की रिपोर्ट
Khunti News: झारखंड के खूंटी जिले के छाता गांव के लोग लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे हैं. गांव में सुरक्षा और आवश्यक संसाधनों की कमी को लेकर मंगलवार को महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी. यह मुद्दा बाल कल्याण संघ की ओर से आयोजित एक विशेष बैठक में सामने आया. बैठक में ग्रामीणों ने गांव की मौजूदा समस्याओं और जरूरतों को लेकर विस्तृत चर्चा की. इस दौरान सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (पीआरए) प्रक्रिया के माध्यम से गांव की समस्याओं और प्राथमिक आवश्यकताओं का सामूहिक आकलन किया गया.
महिलाओं ने खुलकर रखीं अपनी समस्याएं
बैठक में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया और गांव की जमीनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा. महिलाओं ने बताया कि गांव की कई गलियों में स्ट्रीट लाइट नहीं होने के कारण शाम होते ही अंधेरा छा जाता है. अंधेरे के कारण महिलाओं और किशोरियों को रात के समय घर से बाहर निकलने या कहीं आने-जाने में असुरक्षा महसूस होती है. उन्होंने कहा कि स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि गांव में सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.
शौचालय की कमी से बढ़ रही परेशानी
महिलाओं ने बैठक के दौरान यह भी बताया कि गांव में पर्याप्त शौचालय नहीं होने के कारण उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. खुले में शौच के कारण महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं. महिलाओं ने कहा कि शौचालय की कमी उनके लिए एक गंभीर समस्या है, जिसे जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गांव में पर्याप्त शौचालयों का निर्माण कराया जाए, ताकि महिलाओं और किशोरियों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सके.
पीआरए प्रक्रिया में समस्याएं चिह्नित
सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (पीआरएल) प्रक्रिया के दौरान महिलाओं ने स्ट्रीट लाइट और शौचालय की समस्या को गांव की सबसे बड़ी प्राथमिक आवश्यकता के रूप में चिह्नित किया. ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह मांग रखी कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द इन समस्याओं का समाधान करें. उनका कहना था कि ये सुविधाएं गांव की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान से सीधे जुड़ी हुई हैं.
महिला समूह का पुनर्गठन
बैठक के दौरान महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी की गई. गांव के महिला समूह का पुनर्गठन किया गया, ताकि महिलाएं संगठित होकर सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी निभा सकें. महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे समूह के माध्यम से बचत, आजीविका और सामाजिक मुद्दों पर एकजुट होकर काम करेंगी. साथ ही, गांव के विकास से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी.
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समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा
बाल कल्याण संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों को संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों के सामने रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि संगठन का प्रयास रहेगा कि गांव की महिलाओं की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाए. उम्मीद है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से छाता गांव में जल्द ही बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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