नौ मार्च से झारखंड में मिट्टी की खुदाई बंद, हड़ताल करेंगे मनरेगा कर्मी
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 08 Mar 2026 2:04 PM
सोमवार से झारखंड में मनरेगा का काम बंद हो जाएगा. फाइल फोटो
MGNREGA Workers Strike: झारखंड में मनरेगा कर्मियों ने लंबित मानदेय, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है. नौ से 11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल होगी. मांगें नहीं मानी गईं तो 12 मार्च से राज्यभर में बेमियादी आंदोलन शुरू किया जाएगा. हड़ताल में करीब 5000 मनरेगा कर्मी शामिल होंगे. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
MGNREGA Workers Strike: झारखंड के मनरेगा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को आंदोलन की घोषणा की है. झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने घोषणा की है कि बकाया मानदेय, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सुनवाई नहीं होने के कारण प्रदेश के तमाम मनरेगा कर्मी नौ से 11 मार्च तक सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे. सोमवार से मनरेगा कर्मी काम नहीं करेंगे. यदि सरकार ने इस बीच ठोस कदम नहीं उठाया, तो 12 मार्च से राज्यव्यापी बेमियादी आंदोलन शुरू किया जाएगा.
हड़ताल में 5000 मनरेगा कर्मी होंगे शामिल
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय ने बताया कि हड़ताल में करीब 5000 मनरेगा कर्मी शामिल होंगे. क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत कर्मी पिछले छह महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट झेल रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना संसाधनों के अतिरिक्त कार्य बोझ थोपा जा रहा है. कई कर्मी दुर्घटनाओं और तनाव का शिकार हो रहे हैं. इलाज के अभाव में कुछ कर्मियों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से न तो स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था है और न ही मुआवजे की.
मंत्री का आश्वासन भी नहीं हुआ पूरा
प्रदेश महामंत्री दीपक महतो ने कहा कि वर्ष 2024 में हुए लिखित समझौते और ग्रामीण विकास मंत्री के साथ हुई वार्ता के बावजूद धरातल पर कुछ भी लागू नहीं हुआ. उन्होंने वेतन विसंगति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही विभाग में कुछ पदाधिकारियों को ग्रेड-पे का लाभ मिल रहा है, जबकि फील्ड कर्मियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है.
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ठेका मजदूरों के लिए नीति बनाने की मांग
संघ ठेका मजदूरों के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी स्थायीकरण नीति बनाने की मांग कर रहा है. राज्य मनरेगा कोषांग के पदाधिकारियों के समान ग्रेड-पे की मांग हो रही है. स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और मृत्यु होने पर आश्रितों को उचित मुआवजा मांगी जा रही है. संघ ने लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करने का आग्रह किया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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