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बेटा-बेटी एक सामान, न करें लैंगिक भेदभाव : डीसी

Updated at : 23 Apr 2025 8:57 PM (IST)
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बेटा-बेटी एक सामान, न करें लैंगिक भेदभाव : डीसी

जामताड़ा. समाहरणालय सभागार में जेंडर समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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जामताड़ा. समाहरणालय सभागार में जेंडर समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस अवसर पर डीसी कुमुद सहाय ने कहा हमारे संविधान में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया है, लेकिन अलग-अलग समाज अलग-अलग रूप से महिला और पुरुष में भेद करता है. इससे समाज में महिला हिंसा बढ़ती है. इसे रोकने के लिए हमें जेंडर समानता को बढ़ावा देना होगा. यह समझना होगा कि लड़का और लड़की समान है, जो बेटा कर सकता है वो आज बेटी भी कर सकती है. बेटियां भी सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही है. उन्होंने कहा अभिभावकों को भी समझना होगा कि बेटा-बेटी में कोई भेद भाव नहीं हो. क्योंकि लैंगिक भेदभाव घरों से देखने को मिल जाना आम है. ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि अपने बच्चों में भेदभाव नहीं करें. बेटा बेटी को समान अधिकार दें. उन्होंने सभी से कहा यह प्रतिज्ञा लें कि अपने स्तर से लिंग के आधार पर भेद भाव नहीं करेंगे और लोगों में जागरुकता लाएंगे. मौके पर सिविल सर्जन डॉ आनंद मोहन सोरेन, डीइओ चार्ल्स हेंब्रम, डीएसडब्ल्यूओ कलानाथ, डीएसइ विकेश कुणाल प्रजापति आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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UMESH KUMAR

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