कुंजविलास के साथ हरिनाम संकीर्तन का समापन

नापितपाड़ा टोला में आयोजित चौबीस प्रहर हरिनाम संकीर्तन कुंजविलास व नर नारायण सेवा के साथ संपन्न हुआ.
कुंडहित. नापितपाड़ा टोला में आयोजित चौबीस प्रहर हरिनाम संकीर्तन कुंजविलास व नर नारायण सेवा के साथ संपन्न हुआ. कीर्तनिया लक्खी रानी दास व उनके सहयोगी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन, भजन, नृत्य आदि से किया. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जीव जगत को शिक्षा देने के लिए अनंत लीलाएं की है. कलियुग में जीवों का अल्पायु के कारण उद्धार का एक मात्र उपाय हरिनाम संकीर्तन है. दिन भर अपने कर्म करते हुए कम से कम एक बार सच्चे मन से भगवान का स्मरण करना चाहिए. लीला के क्रम में उन्होंने कहा कि गौरांग महाप्रभु जात पात, ऊंच नीच का भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया है. हम सभी सांसारिक जीव को हमेशा सत्कर्म व जीवों के प्रति दया भाव रखना चाहिए. कहा सभी जीवों में भगवान का अंश है. अक्सर लोग बिना कुछ सोचे समझे गलत कार्य कर बैठते हैं. अच्छे फल प्राप्ति की आशा करते हैं जो कदापि संभव नहीं है. सुंदर समाज निर्माण के लिए सत्संग व सत्कर्म करना चाहिए. कुंजविलास के उपरांत भक्तजनों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया.
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By Prabhat Khabar News Desk
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