उपयोग के पहले ही कई भवन खंडहर में तब्दील
Updated at : 17 Jul 2018 6:18 AM (IST)
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जामताड़ा : जिलेभर में दर्जनों ऐसे सरकारी भवन हैं जो बनकर तैयार हैं, लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है. अब धीरे-धीरे ऐसे भवनों की स्थिति जर्जर होने लगी है. इन भवनों को जिस उद्देश्य से बनाया गया वो आज तक पूरा नहीं हो पायी है. इन भवनों के निर्माण में सरकार ने करोड़ों […]
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जामताड़ा : जिलेभर में दर्जनों ऐसे सरकारी भवन हैं जो बनकर तैयार हैं, लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है. अब धीरे-धीरे ऐसे भवनों की स्थिति जर्जर होने लगी है. इन भवनों को जिस उद्देश्य से बनाया गया वो आज तक पूरा नहीं हो पायी है. इन भवनों के निर्माण में सरकार ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया, लेकिन उपयोगिता व उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो सकी.
कहीं मत्स्य कृषक प्रशिक्षण भवन, लघु एवं कुटीर का प्रशिक्षण के लिए बनाया गया भवन तो कहीं अस्पताल भवन, पुस्तकालय भवन, किसान भवन, जीएनएम प्रशिक्षण भवन सहित दर्जनों भवन यूं ही बेकार पड़ा है. न तो इस पर संबंधित विभाग की नजर है और नहीं सरकार इसकी किसी प्रकार की छानबीन कर रही है.
38 लाख का पुस्तकालय भवन फांक रहा धूल
सदर प्रखंड परिसर में 9 साल पहले पुस्तक प्रेमियों के लिए करीब 38 लाख रुपये की लागत से पुस्तकालय भवन का निर्माण कराया गया था, परंतु आज तक इसे चालू नहीं किया गया. भवन बनने के बाद कभी-कभार शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए उपयोग कर लिया जाता है. परंतु जिस उद्देश्य से भवन का निर्माण हुआ था वह पूरा नहीं हो पाया. वर्तमान में भवन के शीशे टूट रहे हैं. परिसर के चारों ओर झाड़ी ऊगने लगे है. बावजूद इस पर किसी प्रकार का पहल नहीं की जा रही है.
राजीव गांधी सेवा केंद्र बना भूत बंगला
कुंडहित. प्रखंड परिसर में मनरेगा से मोटी लागत लगाकर राजीव गांधी सेवा केंद्र बनाया गया था. यह निर्माण कार्य 2011-12 में 25 लाख की लागत से कराया गया था, लेकिन इस भवन का उपयोग वर्तमान में नहीं किया जा रहा है. हालांकि बनने के बाद कुछ दिनों तक अंचल सह प्रखंड कार्यालय इस भवन में चल रहा था. लोगों का आना-जाना भी हो रहा था और साफ-सफाई भी हो रही थी. नया ब्लॉक भवन बन जाने के बाद से यहां ताला लटक रहा है. वर्तमान में भवन की स्थिति काफी दयनीय हो गयी है. भवन अब भूत बंगला लगता है.
नारायणपुर में भी करोड़ों के भवन का उपयोग नहीं
नारायणपुर. नारायणपुर प्रखंड क्षेत्र में बने आदिवासी छात्रावास, ट्रेशम भवन, दीनदयाल उपाध्याय पुस्तकालय भवन सहित कई ऐसे भवन हैं जिसका निर्माण कार्य आज से वर्षों पहले पूर्ण होने के बाद भी उपयोग नहीं हुआ. इस कारण भवन जर्जर हो रहे हैं. हाइ स्कूल प्रांगण में बने आदिवासी छात्रावास बनने के बाद विभाग द्वारा कभी उसे उपयोग लाने की दिशा में पहल नहीं की गयी. नारायणपुर डाक बंगला मैदान में बने दीनदयाल उपाध्याय पुस्तकालय भवन अनुपयोगी बन कर धीरे-धीरे जर्जर होने लगा है.
झाड़ियों से घिरने लगी लाखों की भवन
फतेहपुर. प्रखंड क्षेत्र में कई ऐसे सरकारी भवन मिल जायेंगे जो वर्षों पूर्व लाखों की लागत से बनवा तो दिया गया, परंतु वर्तमान में यह बेकार पड़ा हुआ है. अभी तक इन भवनों का प्रशासनिक उपयोग नहीं हो रहा है. फलस्वरूप ये भवन बेकार साबित हो रहे हैं. प्रखंड क्षेत्र में वर्षों पूर्व राजीव गांधी सूचना केंद्र के नाम से धड़ल्ले से 10 लाख की लागत से भवन का निर्माण करा दिया गया, परंतु अबतक इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है. राजीव गांधी सूचना केंद्र के नाम से चापुड़िया, अगैयासरमुंडी, खमारबाद एवं फतेहपुर पंचायत सचिवालय के ठीक बगल में बनवा दिया गया है. ये भवनें अब झाड़ियों में घिरने लगे हैं. परंतु न तो इसकी सफाई की जा रही है और न ही इसका उपयोग किया जा रहा है.
बनने के बाद आजतक नहीं हुआ तहसील कचहरी का उपयोग
नाला. कुलडंगाल पंचायत अंतर्गत इंद्रकुड़ी गांव में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के द्वारा तहसील कचहरी का निर्माण ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के द्वारा वर्ष 2015 कराया गया था. इस निर्माण कार्य में 20 लाख 50 हजार रुपये खर्च हुए थे, परंतु बनने के बाद आज तक इस भवन का उपयोग नहीं किया गया. इस भवन का मुख्य उद्देश्य ग्राम कचहरी के रूप में विकसित कर राजस्व एवं भूमि संबंधित समस्याओं का समाधान पंचायत स्तर पर किया जाना था, लेकिन भवन तो बन गया पर इसका उपयोग नहीं होने के कारण ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है.
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