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हम हैं तकनीक के बादशाह : टेक एक्स में उदीयमान इंजीनियरों की खोज ने किया अचंभित

Updated at : 04 Mar 2024 9:17 PM (IST)
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हम हैं तकनीक के बादशाह : टेक एक्स में उदीयमान इंजीनियरों की खोज ने किया अचंभित

जमशेदपुर के बिष्टुपुर एसएनटीआइ में लगी टेक एक्स प्रदर्शनी में आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने वाले उपकरणों की खोज का इंजीनियरों प्रदर्शन किया. आयोजन टाटा स्टील के संस्थापक जमशेदजी टाटा के जन्मदिवस पर हुआ था.

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टाटा स्टील समेत टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों के उदीयमान इंजीनियरों की खोज कंपनी की प्रोडक्टिविटी और प्रोडक्शन को जहां बेहतर बना देगी, वहीं, आम लोगों की जिंदगी को भी आसान कर देगी. ऐसे ही इंजीनियरों की खोज टाटा स्टील के संस्थापक जमशेदजी टाटा के जन्मदिवस पर बिष्टुपुर एसएनटीआइ में लगायी गयी टेक एक्स प्रदर्शनी में दिखी. यह प्रदर्शनी पांच मार्च तक चलेगी. टाटा स्टील के मैनेजमेंट ट्रेनीज, ट्रेड अप्रेंटिस, जेट उत्तीर्ण के अलावा टिनप्लेट, टाटा मेटालिक्स, टाटा पिगमेंट समेत अन्य कंपनियों की भी खोज को यहां प्रदर्शित किया गया है. इसमें कई नयी खोज का इस्तेमाल कंपनियाें ने शुरू कर दिया है, जबकि बाकी खोज के इस्तेमाल की तैयारी की जा रही है. जमशदेपुर से ब्रजेश सिंह की रिपोर्ट.

टाटा स्टील की सहूलियत के बनाया मैप एप्लीकेशन

टाटा स्टील के मैनेजमेंट ट्रेनीज संग्राम पात्रा, वेदांत गौरव, अभिजीत ने मिलकर एक एप विकसित किया है. इस एप के जरिये यह पता आसानी से लग सकेगा कि आखिर टाटा स्टील के भीतर कौन सा प्लांट कहां है और क्या क्या सुविधाएं है. इस एप को करीब दो माह के मेहनत के बाद तैयार किया गया है. इसको अभी पेटेंट कराया जायेगा और इसका इस्तेमाल भी टाटा स्टील में किया जा सकता है. गूगल लोकेशन की तर्ज पर टाटा स्टील के लिए एक्सक्लूसिव यह एप तैयार किया गया है.

काम के दौरान कर्मचारी थक तो नहीं गया, पता लगायेगी यह मशीन

टाटा स्टील के ही मैनेजमेंट ट्रेनीज पारिजात घोष, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, रुद्र त्रिवेदी, प्रेरणा दास ने मिलकर एक एप्लीकेशन तैयार किया है. यह आइएमयू सेंसर के जरिये संचालित होगी. यह कर्मचारियों के कदमों की आहट और उसके मूवमेंट को कैमरे के जरिये पहचान लेगा कि शॉप फ्लोर पर काम कर रहा कर्मचारी कहीं थक तो नहीं गया है. उसके चाल को पकड़ लेने के बाद एक अलार्म बजेगा, जिसके बाद उक्त कर्मचारी की जांच की जा सकेगी. इससे शॉप फ्लोर पर दुर्घटना को रोका जा सकेगा. इसका पायलट प्रोजेक्ट करीब 50 कर्मचारियों के बीच प्रयोग में लाया जा चुका है, जिसमें यह सफल रहा है.

टिनप्लेट के जूनियर इंजीनियरों ने एआइ से सेफ्टी के व्यवहार को पहचानने का सिस्टम बनाया

टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन के जूनियर इंजीनियर अंशुमन आनंद, जोय महादानी, सागर, सरनजीत सिंह, अब्दुल शाकीब ने मिलकर एक सिस्टम तैयार किया है. आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (एआइ की मदद से प्लांट के भीतर किस तरह की सुरक्षा है, इस पर नजर रखा जा सकेगा. कोई कर्मचारी वैसा एरिया में जायेगा, जहां उसको नही जाना है, वहां अगर चला गया तो एक जोरदार अलार्म बजेगा, जिसके बाद उक्त कर्मचारी को वहां से हटाया जा सकेगा या रोका जा सकेगा. ऐसा सिस्टम एआइ से संचालित होगी ताकि किसी तरह के हादसे को रोका जा सके.

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टाटा स्टील के ट्रेनीज ने बनाया स्मार्ट हेलमेट

टाटा स्टील के मैनेजमेंट ट्रेनीज खुशबू, श्रुति, आर्चित, अमलान, अमन, इजहार ने एक स्मार्ट हेलमेट बनाया है, जिसके जरिये किसी तरह के हादसे को माइंस या इंडस्ट्रीज में रोका जा सकेगा. लोरा टेक्नॉलॉजी के जरिये करीब दो किलोमीटर के रेंज में किस तरह का माइंस या प्लांट में गैस तो कहीं नहीं है, इसका सेंसर से पता चल जायेगा, जिसके जरिये उक्त कर्मचारी पर नजर रखी जा सकेगी जबकि कर्मचारी को भी अलर्ट कर दिया जायेगा. इस सेंसर को जीपीएस के जरिये संचालित की जायेगी.

ट्रेड अप्रेंटिस छात्रों ने बनाया ग्लव्स, जो कर्मचारी की बचायेगा जान

टाटा स्टील के ट्रेड अप्रेंटिस रितु वाजपेयी, गोलू किस्कू, सिद्धु पुरन मुर्मू, महेश्वर सिंह मुंडा, मोनिका सिंह, सोना पावरा सोरेन, रेशमी टुडू, विश्वजीत हेम्ब्रम, किरण बेसरा और आकृति कुमारी ने एक नायाब ग्लब्स तैयार कििया है. यह ग्लब्स कर्मचारी को किसी भी हादसे से बचायेगा. इस ग्लब्स के जरिये कार्बन डायॉक्साइड, एसपीओ 2 जैसे गैस को सुंघने की शक्ति होगी ताकि माइंस में काम करने या किसी भी हजार्ड एरिया में काम करने पर कर्मचारियों के ग्लब्स में ही मालूम चल जायेगा. उक्त कर्मचारी के सारे मूवमेंट पर उससे जुड़ा मीटर भी होगा, जो कंट्रोल रुम तक सारी जानकारी पहुंचाता रहेगा.

नोवामुंडी माइंस में डंपरों की टक्कर रोकने का बनाया उपकरण

टाटा स्टील के नोवामुंडी माइंस के ट्रेनीज विजय कुमार साहा, ब्रह्मासा, अभिनव राज, एसएल कृष्णा, शुभम राय, सोनी कुमारी, ममता, अनिल स्वाईं, सुमित कुमार ने मिलकर एक ऐसा सेंसर बनाया है, जो नोवामुंडी माइंस में संचालित डंपरों के सामने सामने के टक्कर को रोकेगा. यह पीटीएस सेंसर से संचालित होगी, जिसको डंपर में लगा दिया जायेगा. जैसे ही 30 मीटर की दूरी पर कोई सामने से गाड़ी आयेगा, वैसे ही वह डंपर का स्पीड कंट्रोल कर देगा और बजर बजने लगेगा. जब 20 मीटर पर यह गाड़ी आयेगी तो खुद से स्टीयरिंग वाइब्रेट करने लगेगा ताकि ड्राइवर हादसे को रोक सके.

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पानी का लीकेज रोकने और पता लगाने का उपकरण

टाटा स्टील की मैनेजमेंट ट्रेनीज शभदा मंडावी, शिवराज बीके, साहित्य, भवेश खीरा, इशिका, शशांक, अभिषेक, शिवांस ने मिलकर एक उपकरण बनाया है. इस उपकरण के जरिये एक किलोमीटर तक के दायरे में पानी के पाइप के लीकेज को पकड़कर बता देगा कि कहां लीकेज है, जिसके लिए खुदाई की जरूरत नहीं होगी. हर एक किलोमीटर में इस सिस्टम को लगा देने से ही मालूम चलेगा. हाड्रोफोन सेंसर के जरिये इसको पता लगाया जायेगा. इसकी खोज को टाटा स्टील यूआइएसएल (पहले जुस्को) ने भी इस्तेमाल करने की इच्छा जतायी है. इसके अलावा कलिंगानगर और टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में भी इसका इस्तेमाल होगा. इसकी खोज करने वालो ने कहा कि अगर इस तरह के लीकेज को कंपनी में बचाया जाये तो 23 ओलंपिक के स्वीमिंग पुल का पानी एक साल में बचाया जा सकेगा.

टाटा पावर बैटरी के परफार्मेंस की जांच कर लेगा सेंसर

टाटा पावर के ऋषभ कुमार, रोहित कुमार चौधरी, कुशल मुखर्जी, रवि कुमार सिंह और श्रुति कुमार ने एक प्रोजेक्ट पर काम किया. वह सोलर या बैटरी के परफार्मेंस को बता सकेगा. यह मोबाइल से जुड़ा रहेगा. अगर बैटरी का परफार्मेंस ठीक नहीं है और वह जरूरत के हिसाब से बैकअप नहीं दे रहा है तो उसका अलर्ट सीधे जीएसएम के एसएमएस के माध्यम से दिया जा सकेगा. इसके जरियेकिसी तरह का फेल्योर को रोकने में सफलता मिल सकेगी.

दुर्गम इलाकों में 3 किमी तक तार की गड़बड़ी बताएगा उपकरण

टाटा स्टील के जोडा खदान के जेइ राजेश कुमार बेहरा, मंजूर अहमद, कालीपदो दास और खगपति मंडल ने मिलकर एक कंपनी के साथ काम किया. इन लोगों ने जोडा के माइंस एरिया में दुर्गम इलाके के बिजली के ओवरहेड तार के दौरान हुई गड़बड़ियों को पता लगाया जा सकेगा. हरेक तीन किलोमीटर के एरिया में तार के ऊपर कंडक्टर पर एक अलार्म लाइट लगेगा, जो बैटरी से संचालित होगी. वह बता देगा कि कहां पर गड़बड़ी हुई है. इसके आधार पर टेस्ट कर आसानी से जांच कर लिया जायेगा. यह सिस्टम कंट्रोल रुम से जुड़ा रहेगा. इसका इस्तेमाल जोडा इलाके में हो रहा है.

स्लैग से मेटल निकालने के उपकरण किया तैयार

टाटा पिगमेंट के इंजीनियर प्रशुन नुई, साकेत बद्र, संजीव कुमार ने मिलकर स्लैग से मेटर रिकवरी का एक सिस्टम विकसित किया है. यह एक तरह का क्रशर मशीन है, लेकिन उसमें तीन तरफ से स्लैग की छंटाई हो सकेगा. एक तरफ खाली स्लैग निकलेगा जबकि एक तरफ मेटल निकल जायेगा और दूसरी तरफ गैर जरूरी उपकरण निकल जाया करेगा. टाटा स्टील इस सिस्टम का उपयोग एनआइएनएल कंपनी भुवनेश्वर में किया जा रहा है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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