Jamshedpur news. अब सुरक्षित होंगे गजराज : झारखंड में खुला पहला एलीफेंट केयर सेंटर

Published by : PRADIP CHANDRA KESHAV Updated At : 14 Apr 2026 5:59 PM

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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

दलमा में सात हेक्टेयर में फैला है यह सेंटर, डॉक्टरों और महावतों की टीम होगी तैनात

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Jamshedpur news.

झारखंड अपने वन्य प्राणियों के लिए जाना जाता है. यहां का राजकीय पशु हाथी है. झारखंड के गठन के 25 साल के बाद अब जाकर राज्य का पहला एलीफेंट रेस्क्यू व केयर सेंटर खुलने जा रहा है. वन विभाग की ओर से इसे तैयार किया गया है, जिसमें जंगली जानवरों के रखरखाव की व्यवस्था काफी बेहतर की गयी है. करीब एक करोड़ की लागत से सात हेक्टेयर में इसे तैयार किया गया है, जो दलमा की तराई में डिमना लेक के पास भादुडीह के पास बनाया गया है. इसका उद्घाटन जल्द हो जायेगा. इस सेंटर में हाथियों की देखभाल के लिए समुचित और आधुनिक व्यवस्थाएं की गयी हैं. यहां उनके लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध रहेगा. पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तालाब और वाटर टैंक बनाये गये हैं. हाथियों के स्नान के लिए विशेष व्यवस्था भी की गयी है. सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात होगी. डॉक्टर्स हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच और उपचार करेंगे. इसके अलावा अनुभवी महावतों की भी नियुक्ति की जायेगी. सेंटर में हाथियों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गयी है. सेंटर को हाथियों के प्राकृतिक आवास के अनुरूप विकसित किया गया है.

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कोट –

एलीफेंट केयर सेंटर पूरी तरह तैयार है और इसी माह इसका उद्घाटन किया जायेगा. यहां घायल या भटकने वाले हाथियों के उपचार, पुनर्वास और देखरेख की विश्वस्तरीय व्यवस्था होगी.

– सबा आलम अंसारी, डीएफओ, दलमा

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दलमा के बाद चाईबासा समेत तीन स्थानों पर खुलेगा सेंटर

दलमा में पहला इस तरह का रेस्क्यू सह एलीफेंट केयर सेंटर बनाया गया है, लेकिन ऐसा और तीन सेंटर बनाये जा रहे हैं. इसके तहत हजारीबाग और लातेहार के बीच दामोदर नदी के किनारे, रांची और गुमला के बीच और पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा में भी ऐसा सेंटर खोला जायेगा. वहां भी हाथियों के अलावा घायल जानवरों का इलाज संभव हो सकेगा. राज्य में अब तक घायल हाथियों के उपचार और रेस्क्यू के लिए वन विभाग को बाहरी विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ती थी. कई मामलों में दूर-दराज से टीम बुलाने के कारण इलाज में देरी हो जाती थी, जिसका खामियाजा हाथियों को जान गंवाकर चुकानी पड़ती थी. इस कारण इसकी जरूरत को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

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