आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि बरी, 12 साल पुराना है मामला

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12 साल पुराने मामले में बरी होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि (बीच में). फोटो: प्रभात खबर

Chatra News: चतरा के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि को 12 वर्ष पुराने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में अदालत से राहत मिली है. साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया. नागमणि ने फैसले को सत्य की जीत बताते हुए मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चतरा से मो. तसलीम की रिपोर्ट

Chatra News: पूर्व केंद्रीय मंत्री और चतरा के पूर्व सांसद नागमणि को 12 वर्ष पुराने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी इदित होरो की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया. लंबे समय से चल रहे इस मामले में न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका. इस फैसले के बाद नागमणि और उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है. अदालत के निर्णय को उन्होंने न्याय की जीत बताया है.

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वर्ष 2014 में दर्ज हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार इटखोरी थाना कांड संख्या 20/14 के तहत तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी जयशेरवी मुर्मू ने 23 मार्च 2014 को मामला दर्ज कराया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए नागमणि ने 19 मार्च 2014 को इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर परिसर में एक सभा को संबोधित किया था. इसी आरोप के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और तब से यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था.

आठ गवाहों की गवाही के बावजूद आरोप साबित नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई. हालांकि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं है. साक्ष्य के अभाव में अदालत ने नागमणि को दोषमुक्त करते हुए बरी करने का आदेश दिया. इस फैसले को मामले का महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है.

2024 के चुनाव में हुई थी गिरफ्तारी

यह मामला वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान अचानक चर्चा में आ गया था. न्यायालय के आदेश पर उसी पुराने मामले में नागमणि को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. उनकी गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में काफी हलचल पैदा कर दी थी. उस समय उनके समर्थकों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताया था, जबकि विरोधी दलों ने इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया करार दिया था.

नागमणि ने बताया राजनीतिक साजिश

न्यायालय से बरी होने के बाद नागमणि ने फैसले पर संतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अंततः सत्य की जीत हुई है. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 में मामला दर्ज होने के बावजूद उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई. वह लगातार चतरा क्षेत्र में आते-जाते रहे, लेकिन उन्हें कभी किसी नोटिस या वारंट की जानकारी नहीं मिली. नागमणि ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान नामांकन प्रक्रिया के समय उन्हें एक साजिश के तहत गिरफ्तार कराया गया, जिससे उन्हें चुनावी नुकसान उठाना पड़ा.

चुनाव हारने का भी किया जिक्र

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जेल जाने की वजह से उनकी चुनावी गतिविधियां प्रभावित हुईं और इसका असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ा. उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें जेल नहीं जाना पड़ता तो चुनाव का परिणाम अलग हो सकता था. उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे. इसलिए उन्हें न्याय मिला है.

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समर्थकों ने जताई खुशी

न्यायालय के फैसले के बाद उनके समर्थकों और सहयोगियों ने खुशी जाहिर की. इस दौरान अधिवक्ता निर्मल कुमार दांगी, विनीत रंजन और चंदन कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे. वहीं, दिनेश दांगी, अशोक दांगी, अभय दांगी समेत अन्य समर्थकों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे सत्य और न्याय की जीत बताया. नागमणि ने कहा कि वह आगे भी अपनी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां जारी रखेंगे और जनता के बीच जाकर अपनी बात रखते रहेंगे.

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