झारखंड में जंगल की अंधाधुंध कटाई, लकड़ी माफिया को रोकने वाला कोई नहीं

क्षेत्र में जो भी वन संपदा है वह धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है. अगर इसी तरह हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की हरियाली और वन संपदा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी
पूर्वी सिंहभूम (बरसोल), गौरब पाल : एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्ष बचाओ जंगल बचाओ व वृक्ष लगाओ अभियान चला रही है. वहीं दूसरी तरफ बहरागोड़ा व बरसोल के कुछ लकड़ी माफिया के द्वारा वर्षों पुराने पेड़ों की अंधाधुन कटाई की जा रही है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि सरकार के द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु किया जा रहा प्रयास कितना सफल होगा. जानकारी के लिए बताते चलें कि भूतिया पंचायत अंतर्गत चंद्रपुर गांव में चंद्रपुर मध्य विद्यालय से दाहिने की और जंगल में महज एक किलोमीटर जाने के बाद करीब एक एकड़ जगह में लकड़ी माफियाओं ने अवैध लकड़ी का कारोबार फैला रखा है.
सूत्र बताते हैं कि इस जगह से हफ्ता में 3 से 4 दिन बड़े-बड़े ट्रक में लोड होकर लकड़ी को पश्चिम बंगाल या फिर ओडिशा भेजा जाता है. इस जगह आकाशीया, साल आदि पेड़ को काट करके रखा गया है. यहां से हर रोज लाखों का अवैध कारोबार हो रहा है.बताया गया कि जहां पर इतने सारे लकड़ी को काटकर रखा गया है ऊक्त जगह साधु चरण हेम्ब्रम,हम्बा हेंब्रम के बंसज के नाम पर है.
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जो भी वन संपदा है वह धीरे-धीरे नष्ट होती जा रही है. अगर इसी तरह हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की हरियाली और वन संपदा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और इसके जिम्मेदार वन विभाग के अफसर होंगे. जिनके संरक्षण में यह कारोबार दिन-रात चल रहा है. नव जीवन में पौधों की जरुरत को देखते हुए हर साल प्रदेश सरकार हरियाली को लेकर पौधारोपण करने के लिए लाखों रुपए का बजट खर्च कर रही है, लेकिन बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र में वन जंगल को लकड़ी माफिया ने चपत लगाने में जुटा हुआ है.
सूत्र बताते हैं कि लकड़ी माफिया ने कटान का एक नया तरीका ढूढ़ निकाला है, वो परमिट के झंझट में नहीं पड़ते है. सीधे पेड़ कटाते हैं यदि बकझक हुई तो थोड़ा जुर्माना कराकर कोरम पूरा कर देते है. और पुलिस विभाग को भी उनका हिस्सा दे देते हैं. जिससे वे मौन रहते है.
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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भूतिया, बरसोल, दरीशोल व सीमावर्ती इलाकों में विभाग के आला अधिकारी तस्करों पर सबसे ज्यादा मेहरबान हैं. यहां के जंगलों में अधिकारियों और तस्करों की मिलीभगत के चर्चे आम लोगों की जुबान पर हैं. यहां के जंगल में हो रहे अंधाधुंध कटाई के बाद ठूठ को छिपाने का कारनामा किया जा रहा है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई तस्करों द्वारा विभाग के मिलीभगत से पेड़ों की कटाई किया जाता है और आग लगा दिया जाता है.
वन विभाग के अधिकारी लकड़ी तस्कारों को पकडने में कोई रूचि नहीं है. किसी मुखबिर द्वारा सूचना मिलने के बावजूद लकड़ी तस्करों को अधिकारी गिरफ्तार करने में नाकाम रहते हैं. कई मामले हैं जिसमे मुखबिरों के द्वारा जानकारी देने के बावजूद वन अधिकारियों ने तस्करों को पकड़ने में रूचि नहीं दिखाया है.
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