बिना पढ़ाये फार्मेसी की डिग्री बांटने की शिकायत के बाद अनिवार्य होगी आधारयुक्त बायोमीट्रिक अटेंडेंस

Published by :Mithilesh Jha
Published at :23 Feb 2025 9:23 PM (IST)
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Dr Montu Kumar M Patel

डॉ मोंटू कुमार एम पटेल.

Jamshedpur News: फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ मोंटू कुमार एम पटेल ने कहा है कि फार्मेसी कॉलेजों में छात्रों और शिक्षकों के लिए अब आधारयुक्त बायोमीट्रिक अटेंडेंस को अनिवार्य किया जायेगा. जानें ऐसा क्यों होने जा रहा है.

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Jamshedpur News: पिछले दिनों केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया कि कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटी फर्जी पीएचडी डिग्रियां बेच रहे हैं. इनमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड की यूनिवर्सिटी शामिल हैं. इसके बाद हर स्तर पर जांच की गयी. जिसमें देश के कई डिम्ड व प्राइवेट यूनिवर्सिटी में फार्मेसी की डिग्री बगैर अटेंडेंस के बांटे जाने की शिकायत फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया को मिली है. इस शिकायत को पीसीआइ ने गंभीरता से लिया है. यही कारण है कि तय किया गया है कि आगामी सत्र से डिप्लोमा व डिग्री में पढ़ाई करने वाले छात्रों एवं शिक्षकों को आधारयुक्त बायोमीट्रिक अटेंडेंस बनानी होगी. सभी विद्यार्थियों को कॉलेज आकर पढ़ना ही होगा. कॉलेज आकर छात्रों को बायोमीट्रिक अटेंडेंस को अनिवार्य कर दिया गया है. अब घर बैठे डिग्री नहीं मिल सकती, और न ही उक्त डिग्री पर किसी मेडिकल दुकान में काम कर सकते हैं. ये बातें फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ मोंटू कुमार एम पटेल ने कहीं. वे अरका जैन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जमशेदपुर पहुंचे थे.

झारखंड में चल रहे हैं 125 फार्मेसी कॉलेज

उन्होंने कहा कि वे बिहार-झारखंड के दौरे पर पहली बार आये हैं. यहां पहुंचने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की. इस बातचीत के क्रम में डॉ मोंटू कुमार एम पटेल ने कहा कि फार्मेसी के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ी है. फिलहाल करीब पांच लाख विद्यार्थी फार्मेसी की पढ़ाई कर रहे हैं. झारखंड में फिलहाल 125 फार्मेसी कॉलेजों का संचालन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि फार्मेसी कॉलेजों में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधारयुक्त बायोमीट्रिक अटेंडेंस को अनिवार्य किया गया है. इस अटेंडेंस की निगरानी फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया करेगा. साथ ही कोर्स फीस कम करने की दिशा में भी होने वाले प्रयासों की जानकारी दी.

एआइ और मेडिसिन डिवाइस आधारित कोर्स की होगी शुरुआत

भारतीय फार्मासिस्टों की डिमांड काफी अधिक है. फार्मेसी को नए उद्योगों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए स्किल डेवलपमेंट के लिए कई नये कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं. इसमें एआइ आधारित व मेडिसिन डिवाइस आधारित कोर्स भी शामिल हैं. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कोर्स को तैयार किया जा रहा है.

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20 करोड़ खर्च कर देश में स्थापित होंगे चार नए स्किल सेंटर

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटूकुमार एम पटेल ने कहा कि फार्मेसी में डिप्लोमा एवं डिग्री के छात्रों की डिमांड काफी अधिक बढ़ रही है. डिमांड के अनुरूप छात्र निकल कर सामने नहीं आ पा रहे हैं. देश व दुनिया को क्वालिटी फार्मासिस्ट मिल सके, इसके लिए देश के चार जोन में स्किल सेंटर की स्थापना की जाएगी. इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. इसे नॉर्थ, इस्ट, साउथ और वेस्ट में बांटा गया है. इसे तैयार करने के लिए कुल 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यहां विद्यार्थियों के साथ ही शिक्षकों को भी नयी तकनीक से जुड़ी जानकारी दी जाएगी. उन्हें स्किल्ड बनाया जाएगा.

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20 फीसदी सिलेबस में बदलाव का अधिकार विवि को होगा

पत्रकारों से बातचीत के क्रम में पीसीआइ के अध्यक्ष डॉ मोंटू कुमार ने कहा कि फार्मेसी के कई नये वर्टिकल पर काम किया जा रहा है. इंडस्ट्री की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया ने मौजूदा दौर में आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कोर्स को डिजाइन किया है. हालांकि, इसके बाद भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी को यह छूट होगी कि वे अपनी जरूरतों के अनुसार सिलेबस में 20 फीसदी का बदलाव कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए काउंसिल से उन्हें अनुमति लेनी होगी. बिना अनुमति के सिलेबस में बदलाव नहीं हो सकेगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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