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सब्जी बेचनेवाले के बेटे के हाथों में है गजब का जादू, जयंती पर जमशेदजी टाटा को ऐसे किया नमन, रद्दी कागज में भी डाल देते हैं जान

Updated at : 06 Mar 2025 5:45 AM (IST)
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suman gope art

कलाकार सुमन गोप और उनकी अद्भुत कलाकारी

Jamsetji Tata Picture On Coin: पूर्वी सिंहभूम के सुमन गोप ने दो रुपए के सिक्के पर जमशेदजी टाटा की तस्वीर बनाकर उन्हें जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किया है. सब्जी बेचनेवाले के बेटे सुमन रद्दी कागज में जान फूंक देते हैं.

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Jamsetji Tata Picture On Coin: गालूडीह (पूर्वी सिंहभूम): जमशेदजी टाटा की जयंती पर गालूडीह के चोड़िंदा निवासी युवा कलाकार सुमन गोप ने दो रुपये के सिक्के पर जमशेदजी टाटा की तस्वीर बना डाली. सुमन गोप ने कहा कि वह पेंटिंग और आकर्षक कलाकृतियां भी गढ़ते हैं. पहली बार दो रुपए के सिक्के पर मिनिएचर पेंटिंग बनायी है. वह भी जमशेदजी टाटा की. इससे वह काफी खुश हैं. उनके पिता सब्जी बेचकर परिवार चलाते हैं, पर सुमन ने अपनी प्रतिभा को गरीबी के बोझ तले दम तोड़ने नहीं दिया. जो सामान लोग फेंक देते हैं, उसी से वह एक से बढ़कर एक कलाकृतियां गढ़ रहे हैं. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी इनकी कला की सराहना कर चुकी हैं.

रद्दी कागज से गढ़ देते हैं कलाकृति

सबजी बेचनेवाले के बेटे के हाथों में गजब का जादू है. ये अपनी कलाकारी से रद्दी कागज में भी जान फूंक देते हैं. सुमन गोप अद्भुत कलाकार हैं. वह पश्चिम बंगाल में गमछा से मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा बना चुके हैं. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी उनकी सराहना कर चुकी हैं. वह पेड़ की जड़ और रद्दी कागज से मां सरस्वती की आकर्षक मूर्तियां भी बनाते हैं. उन्होंने हाल में पेड़ की जड़ से ओलंपिक में भाला फेंककर गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा की कलाकृति गढ़ी थी. सुमन गोप ने पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम कला प्रदर्शनी में कला गढ़ने की बारीकियां सीखी थीं. उसके बाद से वे लगातार शानदार कलाकृतियां बना रहे हैं. चारों तरफ उनकी कलाकारी की तारीफ हो रही है.

पिता सब्जी बेचकर चलाते हैं परिवार


सुमन गोप के पिता पूर्णचंद्र गोप लोकल ट्रेन से सब्जी लेकर जमशेदपुर बेचने जाते हैं. वहां हाट-बाजार में सब्जी बेचकर परिवार चलाते हैं. सुमन गोप गरीबी में पले-बढ़े हैं. पिता के काम में हाथ भी बंटाते हैं, पर अपनी कला नहीं छोड़ते. उनके हाथों में जादू है.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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