खाद्यान्न वितरण में पूर्वी सिंहभूम राज्यभर में सबसे पीछे, दिसंबर में बंट रहा अप्रैल में मिलने वाला चावल

Updated at : 13 Dec 2023 11:08 AM (IST)
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खाद्यान्न वितरण में पूर्वी सिंहभूम राज्यभर में सबसे पीछे, दिसंबर में बंट रहा अप्रैल में मिलने वाला चावल

खाद्यान्न वितरण में पूर्वी सिंहभूम राज्यभर में सबसे पीछे यानीन 24वें स्थान पर है. झारखंड राज्य खाद्य निगम की समीक्षा में यह मामला सामने आया है. वहीं प्रभात खबर की पड़ताल में पता चला है कि ग्रीन कार्डधारियों को अप्रैल में मिलने वाला चावल दिसंबर में बंट रहा है.

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खाद्यान्न वितरण में पूर्वी सिंहभूम का स्थान राज्य में सबसे पीछे यानी 24 वां स्थान पर है. हालांकि जिले के ग्रामीण इलाकों में खाद्यान्न वितरण में यह उपलब्धि 94.29 फीसदी तक है. शहरी क्षेत्र (अनुभाजन) में खाद्यान्न वितरण 69.93 फीसदी है. शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के वितरण का औसत 70.45 फीसदी है जो राज्य में सबसे कम है. मंगलवार को जमशेदपुर शहरी क्षेत्र समेत जिले भर में खाद्यान्न वितरण की गति तेज करने का निर्देश एमडी वाई प्रसाद और खाद्य निदेशालय के निदेशक दिलीप तिर्की ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से चल रही समीक्षा में जिला आपूर्ति पदाधिकारी सलमान जफर खिजरी को दिया.

कहां कम खाद्यान्न वितरण का फीसदी है

11 दिसंबर 2023 तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से बने रान कार्डधारियों को जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र मेन 69.89 फीसदी,जमशेदपुर अक्षेस 69.56 फीसदी,मानगो नगर निगम 68.98 फीसदी,गोलमुरी सह जुगसलाई क्षेत्र में 72.41 फीसदी वितरण किया है, जमशेदपुर अनुभाजन क्षेत्र में खाद्यान्न वितरण के कुल 70.45 फीसदी है, जो जिले के ग्रामीण इलाके के तुलना में कम है. उक्त कमी के कारण जिले में खाद्यान्न वितरण का कुल फीसदी 70.45 फीसदी हो गया.

ग्रीन कार्डधारियों को अप्रैल में मिलने वाला चावल दिसंबर में हो रहा वितरित

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की तर्ज पर प्रदेश में लागू झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत बने ग्रीन राशन कार्ड के लाभुकों को खाद्यान्न के लिए आठ-आठ महीने इंतजार करना पड़ रहा है. उपभोक्ताओं को अप्रैल माह का राशन दिसंबर में वितरित किया जा रहा है. पूर्वी सिंहभूम में पिछले एक साल में साढ़े छह हजार से ज्यादा ग्रीन राशन कार्ड को रद्द करया है. लोगों ने नये सिरे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से बनने वाले पीएच श्रेणी के राशन कार्ड के लिए आवेदन कियश है. वित्तीय वर्ष 2023-24 के पहले माह का चावल दिसंबर में मिलने के बाद पूरे वर्ष भर के खाद्यान्न का ससमय वितरण बड़ी चुनौती बन गया है. केंद्र सरकार की तर्ज पर झारखंड सरकार ने ग्रीन राशन कार्ड के जरिये गरीब लोगों को आश्वस्त किया था कि किसी को भूखा नहीं मरने दिया जायेगा. ऐसे में राशन वितरण में आठ-आठ माह की देरी होने से कार्डधारी ही योजना के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं. ग्रीन राशन कार्ड के माध्यम से प्रति कार्ड होल्डर के साथ परिवार के सदस्यों को 5 किलो के हिसाब से चावल दिया जाता है.

कहां कितने ग्रीन राशन कार्डधारी

  • जिला – कार्डधारी – परिवार के सदस्य

  • पूर्वी सिंहभूम – 24,309 – 70,692

  • पश्चिम सिंहभूम – 22,747 – 55,151

  • सरायकेला खरसावां – 14,269 -42,133

  • राज्य में – 4,68,44 – 14,60,391

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क्यों हुई देरी

जिले में ग्रीन राशन कार्डधारियों के बीच राशन वितरण में देरी की सबसे बड़ी वजह देरी से आवंटन प्राप्त होना रहा. इस कारण देरी से इसका वितरण किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक ग्रीन राशन कार्डधारियों के लिए झारखंड सरकार ने खाद्यान्न का आवंटन विलंब से मिया. इस कारण खाद्य वितरण देरी से शुरू हुआ.

ग्रीन राशन कार्डधारियों को अप्रैल माह के खाद्यान्न का वितरण दिसंबर माह में किया जा रहा है.
सलमान जफर खिजरी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम
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